संभाग में डेंगू के डंक के बाद स्वाइन फ्लू बड़ी चुनौती बनेगा। विशेषज्ञों के अनुसार पारा गिरने के साथ स्वाइन फ्लू के एच1एन1 वाइरस के सक्रिय होने की आशंका बढ़ जाएगी। अमूमन नवंबर में यह वाइरस मानव शरीर के खिलाफ अपना काम करना शुरू कर देता है।
पिछले साल के रिकार्ड स्वाइन फ्लू के पाजिटिव मामलों को नजर अंदाज करते हुए इस बार भी टेस्टिंग लैब पर कुछ नहीं किया गया। इस सीजन भी संदिग्ध मरीजों के खून और थूक के टेस्ट के लिए दिल्ली स्थित सरकारी लैब की रिपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ेगा।
जीएमसी से लैब के टेंडर को जेएंडके मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन को शिफ्ट करने के बाद औपचारिकताएं पूरी होने तक अब कई माह निर्माण पर लग सकते हैं। रियासत में वर्ष 2014 में रिकार्ड स्वाइन फ्लू के पाजिटिव मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने जीएमसी जम्मू में 6.30 करोड़ और सीडी अस्पताल श्रीनगर में 5.635 करोड़ रुपये टेस्टिंग लैब बनाने के लिए मंजूर किए गए थे।
इसमें जीएमसी जम्मू में अक्तूबर 2015 में लैब को शुरू करने के दावे किए गए थे। मगर एक साल में भी कुछ खास नहीं हो पाया। श्रीनगर के स्किमस में स्वाइन फ्लू के टेस्ट की पहले से ही सुविधा उपलब्ध है। रियासत में वर्ष 2009 में स्वाइन फ्लू के एच1एन1 वाइरस ने दस्तक दी थी।
इसके बाद हर साल यह वाइरस पारा गिरने के साथ ही सक्रिय हो जाता है। इसमें कश्मीर संभाग से अधिक लोग पीड़ित हुए थे। राज्य में स्वाइन फ्लू से कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। वर्ष 2009 में जम्मू संभाग में 60 से ज्यादा लोग स्वाइन प्लू से पाजिटिव हुए थे। कुछ साल शांत रहने के बाद वर्ष 2014 में स्वाइन फ्लू ने दोबारा हमला किया।
जिला स्तर पर स्थायी आइसोलेट यूनिट न होने से ऐसे संक्रमित मरीजों को उचित चिकित्सा देने में चुनौती रहती है। डेंगू के पाजिटिव मामलों का आना जारी है। शुक्रवार को सांबा के एक पीड़ित में डेंगू पाजिटिव पाया गया। बताया जाता है कि पीड़ित दिल्ली किसी काम से गया था और वहीं से उसे यह बीमारी लगी।
इसके साथ जम्मू संभाग में अब तक 88 डेंगू के पाजिटिव मामले सामने आ चुके हैं। इनमें कई अन्य मामलों की रिपोर्ट आना बाकी है।