कश्मीर घाटी में सितंबर में कई दिनों तक हुई बारिश ने दुनिया भर में मशहूर कश्मीरी केसर की फसल को बेहद नुक़सान पहुंचाया। इस कारोबार से जुड़े हज़ारों लोग प्रभावित हैं। कश्मीर में केसर की सबसे बड़ी खेती पम्पोर में होती है। यहां 32 हज़ार एकड़ ज़मीन पर इसकी पैदावार होती है। पम्पोर के बाद ज़िला बडगाम में केसर उगाई जाती है।
इस साल जब फसल तैयार होने को थी तो कश्मीर में कई दिन तक लगातार बारिश चली। इस वजह से केसर के फूल भी नहीं खिल पाए। जम्मू कश्मीर केसर एसोसिएशन के पब्लिसिटी सेक्रेटरी गुलाम मोहिदीन भट मौसम की लगातार तब्दीली को इस साल केसर की फसल की तबाही का कारण मानते हैं।
वह कहते हैं, 'जब हम केसर का बीज बोते हैं तो इसके अंदर से दो-तीन पत्ते निकलते हैं, पर इस बार केसर की ज़मीन में कई दिन तक बारिश का पानी जमा रहा। इससे तीन पत्तों की जगह दस पत्ते निकल आए। इससे बीच में बहुत ज़्यादा नमी पैदा हुई और नतीजा ये हुआ कि केसर के फूल खिल न सके। अगर कुछ खिले भी हैं तो वह बहुत ही कम।'