दस अक्तूबर को बेटी की शादी है। पति के गुजर जाने से सारी जिम्मेदारियां अकेली मां पर हैं। सारे बंदोबस्त करने हैं, लेकिन कैसे? यह ख्याल मां के मन में समंदर की लहरों की तरह आ रहे हैं। घर में इस समय शादी का संगीत होना था, लेकिन पाक गोलों के डर ने माइग्रेंट कैंप में लाकर बिठा दिया। परगवाल सेक्टर के गांव राजपुरा से मुट्ठी के हायर सेकेंडरी स्कूल में पहुंची राज कुमारी ने अपने माइग्रेंट होने का दर्द बयां किया।
बताया कि कुछ साल पहले उनके पति की मौत हो गई। दो बेटे और एक बेटी है। बेटी पूजा की शादी दस अक्तूबर को होनी है। सारे बंदोबस्त करने हैं। शुक्रवार शाम को प्रशासन की तरफ से कहा गया कि गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थानों की तरफ चले जाएं। घर छोड़ कर चली तो आई हूं, लेकिन शादी की तैयारियां कैसे होंगी, यह समझ नहीं आ रहा। शनिवार को ही तो घर में संगीत बिठाना था।