पुंछ के रहने वाले एक पशु व्यापारी बशीर अहमद बकरीद के मौके पर कुछ कमाने के उद्देश्य से बकरियों, भेड़ों के झुंड के साथ कश्मीर आए थे, लेकिन उन्होंने कहा कि हो सकता है इनमें से अधिकांश को अपने साथ वापस ले जाना पड़े। बशीर के अनुसार, पिछले साल इस समय तक उसने अपने सभी पशु बेच दिये थे और त्योहार मनाने के लिए परिवार के पास घर जा रहा था। जबकि इस बार 200 में से कुल 15 बकरियों को ही बेचा है। इस बार आवाजाही पर प्रतिबंध होने के कारण पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है। शनिवार को प्रतिबंध में मिली राहत से उम्मीद बंधी थी कि रविवार और सोमवार को थोड़ी बिक्री बढ़ जाएगी परंतु सारी उम्मीदें समाप्त हो चुकी हैं। अब वह सोमवार की सुबह बचे हुए जानवरों के साथ पुंछ की ओर रवाना होगा
कपड़े की दुकानों पर भी सन्नाटा
लाल चौक के एक रेडीमेड कपड़ा व्यवसायी मोहम्मद यासीन का कहना है कि वह हजरत बल स्थित अपने घर से दुकान पर तीन दिन से पैदल चल कर इस उम्मीद से आता है कि कुछ कपड़े बेंच लेगा परंतु परिस्थितियां इतनी अनिश्चित हैं कि लोग मानसिक रूप से ईद मनाने के लिए तैयार ही नहीं हो पा रहे है। कश्मीर प्रत्येक वर्ष त्योहार पर नए कपड़े खरीदने की परंपरा को निभाता आ रहा है, परंतु इस बार शायद लोग तैयार नहीं हैं। टीआरसी क्रासिंग से पोलो व्यू तक सेकेंड हैंड सामान बेचने वाले विक्रेता भी पाबंदियों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस बार उन्हें ईद की पूर्व संध्या पर अपने स्टाल लगाने की अनुमति नहीं दी गई है।
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संडे बाजार भी पाबंदियों की चपेट में
रविवार बाजार घाटी के सामान्य वर्ग के लोगों के बीच सर्वाधिक पसंद किए जाने वाला बाजार है। यहां बड़े ब्रांड के कपड़े जो किसी कारण से रिजेक्ट हो जाते हैं वह यहां काफी कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं। त्योहारों के मौके पर यह बाजार लोगों के बीच काफी पसंदीदा जगह बन जाती है। परंतु इस बार बाजार में अस्थायी दुकान लगाने वाला सज्जाद हुसैन परेशान हैं। वह कहते हैं कि इस बार हमारे लिए कोई ईद नहीं होगी।