- अदालत ने सरकारी वेतन के साथ निजी व्यवसाय से लाभ पर जताई नाराजगी
अदालत से ... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। श्रीनगर की एक अदालत ने सरकारी वेतन पर रहते हुए कुछ अधिकारियों की ओर से निजी लाभकारी व्यवसाय करने के गंभीर आरोपों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए क्राइम ब्रांच को इस मामले की जांच करने का निर्देश सोमवार को दिया। मामला कथित तौर पर कुछ महिला सरकारी कर्मचारियों के पतियों से जुड़ा हुआ है जो एक निजी ट्यूशन सेंटर में पार्टनरशिप कर रहे हैं।
अतिरिक्त जिला जज श्रीनगर फारूक अहमद भट ने मुक्ति हामिद मकबूल की ओर से दायर मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोप है कि प्रतिवादियों के कुछ पति सरकारी वेतनभोगी होने के बावजूद पार्टनरशिप व्यवसाय में लिप्त हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। याचिकाकर्ता ने अदालत से ताहिरा गुल, नुसरत रिवाज, सैफू निसा और अरशीदा बेगम तथा उनके एजेंटों, रिश्तेदारों व प्रतिनिधियों को एसकेआईई, सद्दाम केआईई प्राइवेट लिमिटेड, सद्दाम केआईई, एसकेआईई नेक्स्ट जनरेशन क्लासेज या इससे मिलते-जुलते किसी भी नाम से संस्थान चलाने, उसका प्रचार करने और याचिकाकर्ता के वैध प्रबंधन व मालिकाना हक में हस्तक्षेप करने से रोकने की मांग की थी।
अदालत ने एसएसपी क्राइम ब्रांच श्रीनगर को निर्देश दिया कि वे 20 जुलाई 2022 से अब तक की जांच करें कि क्या सरकारी नौकरी करते हुए प्रतिवादियों के पति इस संस्थान में कोई निजी लाभकारी गतिविधि में लिप्त रहे हैं ? अदालत ने कहा कि एसएसपी को किसी भी संबंधित पक्ष से रिकॉर्ड या वीडियो फुटेज मंगाने और कानून के प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई करने की पूरी छूट होगी।
जांच रिपोर्ट दो महीने के अंदर अदालत में जमा करने को कहा गया है। साथ ही अदालत ने प्रतिवादियों को एसकेआईई लोगो को एसकेआईई के रूप में तुरंत री-ब्रांडिंग करने से रोक दिया। ऐसा न करने पर उचित कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।