संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। अवामी इत्तिहाद पार्टी (एआईपी) के मुख्य प्रवक्ता इनाम उन नबी ने वीरवार को कहा कि निर्वाचित आवाज को दबाना और कश्मीरियों को दूसरा बताना गांधीवादी विरासत का अपमान है। साथ ही यह दशहरे की भावना के भी विपरीत है।
इनाम उन नबी तिहाड़ जेल में बंद बारामुला के सांसद इंजीनियर रशीद की भूख हड़ताल पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जो अपने विरोध के दूसरे दिन में हैं। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र गांधी जयंती को समारोहों के साथ और दशहरा को बुराई पर अच्छाई की प्रतीकात्मक जीत के रूप में मना रहा है इंजीनियर राशिद ने गांधीवादी विरोध के रूप में भूख हड़ताल का रास्ता चुना है ताकि शासकों को जम्मू-कश्मीर के लोगों द्वारा झेले जा रहे दर्द, अपमान और न्याय के अभाव की याद दिलाई जा सके।
विगत बुधवार को इंजीनियर रशीद ने बापू को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने याद दिलाया कि कैसे गांधी जी ने उस समय कश्मीर को आशा की किरण के रूप में देखा था जब उपमहाद्वीप सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहा था। आज वही कश्मीर राष्ट्र-विरोधी, सांप्रदायिक और चुप कराया हुआ करार दिया जा रहा है। बापू को रशीद का पत्र केवल जेल से लिखा गया संदेश नहीं है, यह पूरे कश्मीरी जनमानस की पुकार है।
इनाम ने आगे कहा कि गांधी जी का दर्शन किताबों या रस्मों में कैद करने के लिए नहीं है बल्कि इसे साहस, सत्य और बलिदान के माध्यम से जीना चाहिए। इनाम उन नबी ने कहा गांधी जी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि उनके चित्रों पर माल्यार्पण करना नहीं बल्कि सभी की गरिमा का सम्मान करना और बिना भेदभाव के न्याय सुनिश्चित करना है।
इसी तरह दशहरा का असली अर्थ केवल रावण के पुतले जलाना नहीं है बल्कि सत्ता के अहंकार, प्रचार के झूठ और कमजोरों के उत्पीड़न को हराना है। यही वह मूल्य है, जिसके लिए इंजीनियर राशिद जेल की सलाखों के पीछे से भी खड़े हैं।
एआईपी प्रवक्ता ने भारत सरकार और न्यायपालिका से नैतिक जिम्मेदारी लेने और इंजीनियर राशिद द्वारा उठाए गए मुद्दों को संबोधित करने का आग्रह किया।