सीआरपीएफ के विशेष महानिदेशक एसएन श्रीवास्तव ने कहा है कि गैर घातक हथियार जैसे प्लास्टिक की गोलियां मौजूदा वक्त में उपलब्ध हैं, जो पेलेट गन के विकल्प के तौर पर उपयोग में लाई जा सकती हैं। कई ऐसे हथियार हैं जो गैर घातक हैं, जिन्हें उपयोग में लाना चाहिए। कश्मीर घाटी में नागरिकों पर पेलेट गन के उपयोग की वजह से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने काफी विरोध जताया था।
इसके बाद गृह मंत्रालय ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति ने मिर्चीयुक्त पावा (पेलारगोनिक एसिड वैनिलीमाइड) के गोले का सुझाव दिया था। सीआरपीएफ को दूसरे विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें टीयर स्मोक म्यूनिशन (टीएसएम) या प्लास्टिक की गोलियों सहित अन्य विकल्प शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रभावी साबित हो रहे हैं।
38वीं बटालियन के स्थापना दिवस पर पत्रकारों से उन्होंने कहा कि घाटी में शांति बहाली के लिए कार्यरत सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच बेहतर तालमेल से बीते दिनों 105 आतंकियों को मार गिराया गया। अमरनाथ यात्रा पर हमले की सूचना थी। श्रद्धालु तय समय में सैन्य कर्मियों के साथ बेहतर तालमेल से नहीं चले, जिसका फायदा आतंकियों को मिला।
बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों से हमले के इनपुट मिले थे, इसके मद्देनजर पूरी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। आतंकियों की ओर से सबसे पहले निशाना सैन्य कर्मियों को बनाया जाना था। इसके अलावा श्रद्धालुओं पर हमले होने का डर था।