वांगचुक ने कहा कि विकास और शासन का मॉडल उस क्षेत्र के लिए काम नहीं कर सकता, जिसकी अपनी अनूठी स्थलाकृति, संस्कृति और जीवनशैली है। संविधान के तहत लद्दाख में चल रहे संघर्ष के साथ एकजुटता दिखाते हुए पूरे हिमालय क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने मुद्दे को उठाया।
हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाना समय की जरूरत है। इसके लिए सभी वर्गों के लोगों को एकजुटता दिखानी होगी। यह अपील लद्दाख के पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने क्लाइमेट फ्रंट की ओर से जम्मू में ऑनलाइन प्रेसवार्ता में हिस्सा लेकर की है। इस दौरान हिमालयी क्षेत्र से संबंधित विभिन्न संगठनों ने मुद्दों को उजागर किया। प्रेसवार्ता में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर क्लाइमेट फ्रंट जम्मू ने राजनीतिक दलों के सामने पांच सूत्रीय मांगपत्र जारी किया है।
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वांगचुक ने कहा कि विकास और शासन का मॉडल उस क्षेत्र के लिए काम नहीं कर सकता, जिसकी अपनी अनूठी स्थलाकृति, संस्कृति और जीवनशैली है। संविधान के तहत लद्दाख में चल रहे संघर्ष के साथ एकजुटता दिखाते हुए पूरे हिमालय क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने मुद्दे को उठाया। साथ ही कहा कि पहाड़ों और यहां के लोगों की भलाई के लिए एकजुटता की जरूरत है। साथ ही कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है, वे लद्दाख में रक्षा परियोजनाओं के खिलाफ नहीं हैं।
तिस्ता प्रभावित नागरिकों से मायालमित लेप्चा और नॉर्थ ईस्ट डायलॉग फोरम से मोहन सैकिया ने स्थानीय स्वदेशी समुदायों की सहमति के बिना ब्रह्मपुत्र और इसके नदी घाटियों पर प्रस्तावित बड़े पैमाने पर जलविद्युत विकास के पारिस्थितिक प्रभावों के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की। हिमालय नीति अभियान के गुमान सिंह और जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के अतुल सती ने भी भूमिगत अतिक्रमण और मलबा उत्पादन को देखते हुए बड़े बांधों, रेलवे और फोरलेन जैसे मेगा बुनियादी ढांचे पर पूर्ण रोक की मांग की। पर्वतीय महिला अधिकार मंच सहित अन्य संगठनों ने भी हिमालय क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उजागर कर लोगों से एकजुटता का आह्वान किया है।