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गोलियों से ज्यादा सीमा पर मौसम के खतरे से जूझ रहे हैं फौजी

Sat, 28 Jan 2017 12:06 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
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सियाचिन ग्लेशियर - फोटो : File Photo
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जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की चुनौती भले ही बड़ी मानी जाती हो, लेकिन सरहदी इलाकों की निगहबानी के सामने मौसम की चुनौती इससे भी बड़ी साबित हो रही है। खून जमा देने वाली सर्द सरहद वाला सियाचिन ग्लेशियर तो और भी कुख्यात है। यहां बर्फीला तूफान ही नहीं, अत्यधिक ठंड का कालचक्र हर साल कई जवानों की जान ले लेता है।
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जम्मू-कश्मीर में एलओसी (नियंत्रण रेखा) और एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) से लेकर बर्फ से ढके रहने वाले अन्य इलाकों में सुरक्षा बलों की मौतों का आंकड़ा हैरान करने वाला है। रक्षा विभाग के अनुमान में यह आंकड़ा आठ हजार से अधिक है।

ज्यादातर मौतें बर्फीले तूफान से हुई हैं लेकिन हिमस्खलन के अलावा भूस्खलन, फ्रॉस्ट बाइट, अल्टीट्यूड सिकनेस और हार्ट अटैक के मामले तकरीबन हर साल रिपोर्ट होते हैं।रियासत में आतंकवाद पिछले करीब तीन दशक से है।
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बर्फीले इलाकों में ड्यूटी देते शहीद हुए 8 हजार अधिक फौजी

avalanche - फोटो : FILE PHOTO
सुरक्षा बल वर्ष 1988 से आतंकवाद से जूझ रहे हैं। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों के दौरान कुल 44 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

इनमें सुरक्षा बलों की मौतों का आंकड़ा जनवरी 2017 तक 6274 दर्ज है। यानी 6 हजार से अधिक जवान आतंकवाद से जूझते हुए शहीद हुए। इसकी तुलना में बर्फीले इलाकों में ड्यूटी देते हुए शहीद होने वाले जवानों का आंकड़ा 8 हजार से अधिक है। 
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