रियासत में समाज कल्याण के क्षेत्र में बड़े बदलाव की कवायद शुरू कर दी गई है। विधवाओं को पेंशन के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र (पति के) के लिए अब उन्हें पुलिस थाने में हाजिरी नहीं लगानी पड़ेगी। गांव के चौकीदार को ही यह प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृत करने की तैयारी की जा रही है।
जम्मू कश्मीर में एक मार्च को सत्ता संभालने वाली पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के समाज कल्याण, वन एवं पर्यावरण मंत्री बाली भगत ने पेंशन के लिए विधवा, बुजुर्ग व विकलांगों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
समाज कल्याण मंत्री बाली भगत ने अमर उजाला संवाददाता से खास बातचीत में कहा कि विधवा महिलाएं पेंशन के लिए औपचारिकताएं पूरी करने खासतौर से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पुलिस थाना के चक्कर लगाती देखी जाती हैं। इससे मन काफी कचोटता है।
कोई नहीं चाहता कि उनके परिवार की महिलाएं पुलिस थाने के चक्कर लगाएं। समाज कल्याण मंत्री बनने के बाद उन्होंने इस परंपरा में बदलाव की जिम्मेदारी उठाई है।
समाज कल्याण विभाग के आयुक्त सचिव से लेकर अन्य अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए हैं कि वह विधवाओं के दिवंगत पति का मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए पुलिस थाने के बजाय गांव के चौकीदार को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृत करें।
पेंशन के करीब डेढ़ लाख मामले लंबित
इसी तरह विकलांगों को डाक्टरों के चक्कर लगाने से राहत दिलवाने की कवायद शुरू की गई है। तहसील स्तर पर अधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है कि वह तहसील में सप्ताह में एक दिन डाक्टर को बुला लें ताकि विकलांग लोगों को डाक्टरों के चक्कर काटने से राहत मिल सके।
जम्मू कश्मीर में वृद्ध, विधवा और विकलांग पेंशन के करीब डेढ़ लाख मामले लंबित पड़े हैं। समाज कल्याण मंत्री बाली भगत का कहना है कि इतनी बड़ी तादाद में मामलों को क्लीयर करने के लिए केंद्र सरकार से करीब 86 करोड़ की दरकार है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को बता दिया गया है ताकि मामलों को जल्द क्लीयरेंस मिल सके।
मुक्त कराएंगे 2.50 लाख कनाल वन भूमि
वन एवं पर्यावरण मंत्री बाली भगत का कहना है कि रियासत में कुल वन क्षेत्र 20.23 लाख हेक्टेयर में से करीब 12 हजार हेक्टेयर (2.50 लाख कनाल) भूमि पर अतिक्रमण है।
मंत्री के रूप में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने की उनकी प्रबल इच्छा है और इस दिशा में संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
दो साल में वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करवाने का लक्ष्य अधिकारियों को दे दिया है। 31 मार्च 2016 तक 1.25 लाख कनाल भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जो अधिकारी तय टारगेट को पूरा करने में कामयाब रहे उन्हें अवार्ड और जो नाकाम रहे उनके एपीआर में असफलता को शामिल किया जाएगा और दंड का प्रावधान भी होगा।
मंत्री के अनुसार भूमाफिया, राजनीतिक अफसरशाही सांठगांठ को तोड़ना उनके लिए चुनौती रहेगी और वह इसके लिए तैयार हैं।