चालीस डिग्री की गर्मी और उस पर उमस ने इंसानों के साथ जीव जंतु भी बेहाल हैं। जीएमसी की इमरजेंसी में सर्पदंश, डाग और मंकी बाइट (कुत्ते, बंदर के काटने) के मामले पहुंचने शुरू हो गए हैं।
रोजाना डाग और मंकी बाइट के 50-60 तथा सर्पदंश के 5-6 मामले पहुंच रहे हैं। सर्पदंश के मामलों में अधिकांश में लोग झाड़फूंक के चक्कर में पीड़ित को देरी से अस्पताल पहुंचाते हैं।
इससे कई बार उनकी जान भी चली जाती है। डाक्टरों के अनुसार आने वाले दिनों में उमस से इन मामलों में और वृद्धि हो जाएगी।
कैसे कोबरा का जहर करता है असर
नेफरोलाजी विभाग के एचओडी डा.एसके बाली के अनुसार अभी भी सर्पदंश के अधिकांश मामलों में लोग झाड़फूंक का इलाज करवाने के बाद ही पहुंच रहे हैं।
सर्पदंश में एक्यूट रेंडर फेलियर के पीड़ित की किडनी अचानक काम करना बंद कर देती है। इसमें शरीर में खून तथा फ्लूयड की कमी और संक्रमण कई गुणा अधिक बढ़ जाता है।
ऐसे गंभीर मरीजों को डायलेसिस मशीन पर रखा जाता है। सर्पदंश के मामलों के लिए जम्मू संभाग से जम्मू, कठुआ, आरएस पुरा, अखनूर, बिश्नाह, पुंछ, राजोरी आदि क्षेत्र प्रभावित रहे हैं।
कैसे बचा सकते है पीड़ित को
पीड़ित को जहर से बचाने के लिए वैक्सीन एंटी वैनम सिरम दी जाती है। शरीर में कितना जहर फैला है, उसी के मुताबिक पीड़ित को इंजेक्शन की डोज दी जाती है।
सांपों की बात करें तो संभाग में समय के साथ बदलाव के चलते शहरी इलाकों में अब कोबरा, वाइपर जैसे सांपों की मौजूदगी मिल रही है।
यह जीव कोल्ड ब्लड एनिमल की श्रेणी में आते हैं। इससे धरती के नीचे तपिश बढ़ने पर यह आक्रामक हो जाते हैं। वहीं, जीएमसी की एंटी रेबिज सेक्शन में डाग और मंकी बाइट के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
इसमें अस्पताल प्रशासन की ओर से निशुल्क 0-3-7-28 दिन पर वैक्सीन दी जाती है। यह सिरम बाइट के बाद एक हफ्ते के भीतर लेना होता है।
कुत्तों से बचाव
पागल कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर जख्म को साबुन से तुरंत धोएं।
पालतू के कुत्ते के काटने पर सुनिश्चित करें कि उसे पर्याप्त वैक्सीन दी गई है।