कश्मीर घाटी में उपजे हालात से अनंतनाग लोकसभा उप चुनाव तो रद्द हो ही गया, पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव का भविष्य भी अधर में लटक गया है। हालांकि, राज्य सरकार ने विधानसभा सत्र के दौरान मार्च में पंचायत व स्थानीय निकाय चुनाव करवाने की घोषणा की थी, लेकिन घाटी में उपजे हालात से इस साल भी चुनाव होने के आसार कम ही हैं।
सियासी दलों ने भी पंचायत व स्थानीय निकाय चुनाव के लिए तैयारियां शुरू की थीं। ग्रामीण स्तर पर गतिविधियां बढ़ा दी थीं। शहरों में निकाय चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूचियों को शार्ट लिस्ट किया जा रहा था, लेकिन कश्मीर घाटी में लगातार खराब हालात की वजह से सियासी दलों ने भी अपनी गतिविधियों पर विराम लगाना शुरू कर दिया है।
चुनाव विभाग ने भी मतदाता सूचियों को तैयार किया हुआ था। पंचायती चुनाव के प्रबंधों पर चर्चाओं का दौर जारी था, लेकिन अनंतनाग लोकसभा उप चुनाव रद्द होने के बाद अब पंचायत व स्थानीय निकाय चुनाव के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। रियासत में स्थानीय निकाय चुनाव आखिरी बार साल 2005 में हुए थे। 2010 से चुनाव लंबित हैं। पंचायतों का कार्यकाल 2016 से खत्म हो चुका है। चुनाव न होने के कारण केंद्र से मिलने वाली करोड़ों की राशि से भी हाथ धोना पड़ रहा है।