दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के बटिंगू इलाके में सोमवार को हुए अमरनाथ यात्रियों पर हमले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। इससे हमले में शामिल आतंकियों की गिरफ्तारी तथा जांच को और गति मिलेगी।
इस बीच अमरनाथ यात्रियों पर हमले का मास्टर माइंड और कश्मीर घाटी में आतंकी संगठन लश्कर की कमान संभाल रहे आतंकी कमांडर अबू इस्माइल को खोजने के लिए दबिश जारी है। वह लगातार अपने लोकेशन बदल रहा है।
कश्मीर रेंज के आईजी मुनीर खान ने बताया कि दक्षिणी कश्मीर के डीआईजी एसपी पाणि के नेतृत्व में गठित एसआईटी में 5 से 6 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। टीम हमले से संबंधित सभी सबूतों को इकट्ठा कर तेजी से जांच पूरी करेगी। यह टीम कुछ सप्ताह पहले अनंतनाग जिले के अच्छाबल में पुलिस पार्टी पर हुए हमले को भी खंगालेगी।
प्रतीकात्मक चित्र
साथ ही यह जानने की कोशिश करेगी कि आखिर पुलिस पार्टी की मूवमेंट की जानकारी आतंकियों तक किसने पहुंचाई। इस हमले में एसएचओ फिरोज डार समेत 6 पुलिस कर्मी शहीद हुए थे। हमले के पीछे बशीर लश्करी का हाथ था जिसे हाल ही में दक्षिणी कश्मीर में मुठभेड़ में मारा गया था।
कहा जा रहा है कि कि अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले को लश्कर ने बशीर लश्करी के बदले की मंशा से अंजाम दिया है। एसआईटी द्वारा इस पहलू को भी खंगाला जाएगा। सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हमले के बाद से ही अबू इस्माइल लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है। वह अब पुलवामा, रेडवानी, आरवनी इलाकों को छोड़ कोकरनाग और ऊपरी इलाकों की ओर चला गया है।
ज्ञात हो कि बुधवार की रात वह अनंतनाग जिले के कोकरनाग में सुरक्षाबलों की छापेमारी से पहले ही फरार हो गया। वह चार बार सुरक्षा बलों का घेरा तोड़कर भाग चुका है। आखिरी बार अप्रैल 2017 में करीमाबाद से भागा था। वह श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र में ईडीआई बिल्डिंग में हुए 2 आतंकी हमले, पांपोर में सीआरपीएफ पर हुए हमले के साथ-साथ अन्य कई घटनाओं का मास्टरमाइंड था।
2015 में कुपवाड़ा से की थी घुसपैठ
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अबू इस्माइल ने अक्टूबर 2015 में सीमांत जिले कुपवाड़ा की शमसाबाड़ी रेंज से घुसपैठ की थी। इसके बाद करीब 6 महीने तक वह उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में सक्रिय रहा। वर्ष 2016 में वह दक्षिणी कश्मीर की ओर चला गया और तब से वहीं सक्रिय है। अबू इस्माइल ने पुलवामा, कुलगाम और शोपियां में लश्कर के सेकंड-इन-कमांड के तौर पर कमान संभाली हुई थी लेकिन हाल ही में उसने अबू दुजाना के बदले घाटी में लश्कर की कमान संभाली है।