आल पार्टीज सिख को-आर्डिनेशन कमेटी (एपीएससीसी) ने कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का विरोध किया है। एपीएससीसी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हाल ही में पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ने गृह मंत्रालय को कश्मीरी पंडित समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की सिफारिश की है।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित हिंदू समुदाय का हिस्सा हैं जो भारत में कभी भी अल्पसंख्यक नहीं हो सकते। रैना के अनुसार नेशनल कमीशन फॉर माइनारिटी एक्ट के अंतर्गत केवल चार समुदाय, जिनमें मुस्लिम, सिख, क्रिश्चियन और बोध हैं, जिसमें बाद में पारसी और जैन को भी शामिल किया है।
उन्होंने कहा कि जो भी फैसला लिया जाए चह नियमों के अंतर्गत हो। वह किसी को भी इस मुद्दे को सियासी फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे। रैना ने बताया कि नेशनल कमीशन फॉर माइनारिटीज के पूर्व अध्यक्ष ने कई बार राज्य सरकार को राज्य में माइनारिटी एक्ट लागू करने को कहा, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
रैना ने कहा कि अगर सिफारिश को मंजूर किया गया तो सिख सड़कों पर उतरकर विरोध करने को मजबूर हो जाएंगे। यही नहीं, आंदोलन भी छेड़ा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार राज्य में माइनारिटी एक्ट लागू करवाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।