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श्री श्री रविशंकर ने कहा, कश्मीरियों के पास ही है कश्मीर मसले का हल

Thu, 24 Nov 2016 12:07 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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कार्यक्रम में मौजूद श्री श्री रविशंकर - फोटो : Amar Ujala
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आर्ट आफ लिविंग के संस्था के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि कश्मीर समस्या का हल बंदूक, पत्थरबाजी तथा गलियों में प्रदर्शन से नहीं निकलेगा बल्कि इसके लिए सभी को बातचीत के लिए आगे आना होगा। कश्मीर का हल कश्मीरियों से होगा न कि बाहर के लोगों से। पत्थरों और बंदूकों से काम नहीं चलेगा बल्कि विचार चिंतन कर इसका हल ढूंढना होगा। वे बुधवार को कश्मीर बैक टू पैराडाइज विषय पर आयोजित कांफ्रेंस में बोल रहे थे। 
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कश्मीर समस्या के हल के लिए उन्होंने साउथ एशिया फोरम फार पीस के गठन की घोषणा करते हुए कहा कि कहा कि भारत सदियों से मानता आया है कि पूरा मुल्क परिवार की तरह है। यदि परिवार के सदस्यों को ही कष्ट होगा तो हाथ पर हाथ बांधे नहीं रहा जा सकता है। आज हम ऐसे समय में खड़े हैं जहां युवा भटकाव के रास्ते पर है।

प्रेरणा से उन्हें रास्ते पर लाना बुद्धिजीवियों का काम है। पत्थरबाजी करने वाले युवाओं को समझाकर उन्हें नया जीवन देना है। इससे बड़ी मूर्खता कोई नहीं हो सकती कि बच्चों को अंधेरे कुएं में धकेला जा रहा है। दिलों को जोड़ने का बड़ा काम करना है। आज सबसे बड़ी चुनौती विश्वास की बहाली करना है। किसी का किसी पर विश्वास नहीं रह गया है। हड़ताल और कर्फ्यू के बीच जनता पिस रही है। उन्होंने कहा कि सदियों से दुश्मन रहे जर्मनी और फ्रांस एक हो गए। उन्हें पता चल गया कि इकट्ठे रहे तो उन्नति होगी।
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दक्षिण एशिया के देश भी एक होंगे तो गरीबी समाप्त हो जाएगी। हमारी लड़ाई गरीबी और आतंकवाद से होनी चाहिए। आतंकवाद इंसानियत, देश की प्रगति और सूफीवाद के खिलाफ है। सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान आज आतंकवाद से जूझ रहे हैं। युवाओं को कट्टरवाद से बचाने की जरूरत है। दशकों से कट्टरवाद के खिलाफ कोई काम नहीं हुआ। आह्वान किया कि मंच के जरिये विश्वास, अपनापन और इंसानियत की हवा चलाई जाए।
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एलओसी पर जवानों से बर्बरता दुर्भाग्यपूर्ण

shri shri ravishankar - फोटो : File Photo
उन्होंने कहा कि मानवता के आधार पर कश्मीर में शांति बहाली के प्रयास करने होंगे ताकि यह फिर से स्वर्ग बन सके। राजनीति से ऊपर उठकर स्थायी रूप से शांति बहाली के लिए सभी को साथ आना होगा। कश्मीर ऋषि-मुनियों तथा सूफी संतों की धरती रही है, लेकिन आज हम विवश हैं। स्कूल जलाए जा रहे हैं। हड़ताल तथा कर्फ्यू के बीच आम जनता कैद है।

लोग बंदूक के डर से अपनी आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। इस वजह से एक मंच का गठन किया गया है जहां लोग खुलकर अपनी बात रख सकें और समस्या समाधान की दिशा में बढ़ सकें। मंथन से अच्छा चिंतन उभरकर आएगा।

उम्मीद है कि सब मिलकर नई सोच शांति की सोच देंगे। उन्होंने कहा कि यह मंच किसी प्रकार का राजनीतिक मंच नहीं है और न ही किसी एजेंसी या सरकार का मंच है। इंसानियत की चिंता करते हुए आध्यात्मिक तौर पर इसे बनाया गया है। कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू को भी आना था, लेकिन वे किन्हीं कारणों से शामिल नहीं हो सके। 

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर में नशा सबसे बड़ी समस्या है। इससे निकलने के प्रयास करने होंगे। लोगों का सरकार, सामाजिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं रह गया है। इस अविश्वास के वातावरण को समाप्त करने की जरूरत है। एलओसी पर जवानों के साथ बर्बरता पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी भी मुल्क को इस प्रकार का बर्ताव नहीं करना चाहिए।

आतंकवाद और अशांति कुछ लोगों के लिए नफे का कारोबार बनकर रह गया है। इस स्थिति से छुटकारा पाना होगा। कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान केवल आजादी के नारे लगाने से नहीं होता है। नारे लगाने वाले बच्चे तो आजादी तक का मतलब नहीं जानते।

नोटबंदी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भ्रष्टाचार, आतंकवाद और नशाखोरी पर अंकुश लग रहा है। बाबा रामदेव की ओर से जींस बनाए जाने संबंधी प्रश्न के जवाब में कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। वे योग से लोगों के बीच के जींस और डीएनए को बदलेंगे। कहा कि वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों तथा पीओके रिफ्यूजियों को भी उनका हक मिले, इसके लिए फोरम प्रयास करेगा।
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