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Jammu News: तीन पीढि़यों से जायरीनों की सेवा कर रहे सत्तार काक

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सत्तार काक। संवाद
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तीन पीढि़यों से जायरीनों की सेवा कर रहे सत्तार काक
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- पीर की गली में 55 साल से हर रोज चार हजार लोगों के लिए चला रहे सत्तू और कहवा का लंगर
संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। हीरपोरा निवासी सत्तार काक पीर की गली स्थित दरगाह पर निस्वार्थ भाव से जायरीनों की सेवा में लगे हैं। वह तीसरी पीढ़ी से हैं जो इस सेवा कार्य में लगे हैं। 55 साल से पहले उनके दादा फिर पिता और अब वह खुद सत्तू और कहवा का लंगर चला रहे हैं। हर रोज करीब चार हजार लोगों को वह सत्तू और कहवा दे रहे हैं।
सत्तार काक ने बताया कि सत्तू और कहवा की यह सेवा हजरत पीर साहब ने स्वयं शुरू की थी। उनके बाद मेरे दादा और फिर मेरे पिता ने इसे आगे बढ़ाया। उनके बाद अब मैंने इसे जारी रखा है। हर दिन लगभग 4,000 जायरीनों और यात्रियों को चाहे वे किसी भी धर्म या पृष्ठभूमि के हों, कश्मीरी कहवा और सत्तू निशुल्क परोसा जाता है। यह सेवा मार्च में शुरू होती है और मौसम की स्थिति के अनुसार दिसंबर तक चलती है।
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इस सेवा के लिए कहवा और सत्तू उनके खेतों से आता है। इसके लिए किसी अन्य से आर्थिक मदद नहीं ली जाती है। हर रोज होने वाले खर्च को वह खुद ही वहन करते हैं। उनका परिवार खेती करता है और उससे ही इस सेवा का खर्च निकलता है।
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बर्फ में फंसे लोगों को देते हैं आसरा और भोजन
सत्तार काक ने बताया कि एक बार दिसंबर में भारी बर्फबारी के कारण मैं पीर की गली में फंस गया था। उस रात मैंने जंगली जानवर भी देखे। पीर की गली से हीरपोरा तक पैदल चलने में मुझे सात घंटे लगे। तब से कोई भी यात्री यहां बर्फ में फंस जाता है तो यहां में उसकी मदद करता हूं। उन्हें दरगाह में आसरे के साथ भोजन-पानी की व्यवस्था करता हूं। चार दिन पहले भी बर्फबारी से रास्ता बंद हो गया था तब काफी लोगों को यहां से निकाला था।
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