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स्कूलों में आगजनी मामले पर दबाव में आए अलगाववादी

Thu, 03 Nov 2016 02:04 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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कश्मीर में जलाया गया एक स्कूल - फोटो : File Photo
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घाटी के स्कूलों में आगजनी की घटनाओं के खिलाफ चौतरफा विरोध के स्वरों से अलगाववादी खेमा दबाव में आ गया है। स्कूली इमारतों को जलाए जाने की सिलसिलेवार वारदातों पर अब तक चुप्पी साधे अलगाववादियों ने बंद के नये शेड्यूल में सात नवंबर को स्कूल सुरक्षा दिवस घोषित किया है।
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स्कूलों में आगजनी के लिए भारतीय एजेंसियाें को जिम्मेदार ठहराते हुए अलगाववादियों के कैलेंडर में लोगों से अपील की गई है कि वे सात नवंबर को स्कूल सुरक्षा दिवस मनाएं। स्कूली बच्चों समेत अभिभावक, शिक्षक, समाज के बुजुर्ग, मस्जिदों और हुर्रियत समर्थक समितियों के सदस्य अपने संबंधित स्कूलाें की ओर मार्च करें।

सुबह नौ बजे से मार्च शुरू कर स्कूलों में पहुंचें और सुबह ग्यारह बजे से शाम चार बजे तक स्कूल परिसर में स्कूल सुरक्षा दिवस आयोजित करें। 
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हिंसा के बीच लगातार जलाए जा रहे हैं स्कूल

घाटी में हिंसक प्रदर्शन - फोटो : PTI
 बंद के कैलेंडर में कहा गया है कि भारतीय एजेंसियों द्वारा स्कूलों को निशाना बनाया जा रहा है जिसके खिलाफ पुरजोर संघर्ष करें। गौरतलब है कि घाटी में दो दर्जन से ज्यादा स्कूली इमारतों में आगजनी हो चुकी है। ज्यादातर वारदातों में इमारतें बुरी तरह से जल गईं। इसे लेकर घाटी में चौतरफा विरोध के स्वर उभर कर सामने आए हैं।

सरकार सहित मुख्यधारा के सियासी दलों ने खुलकर स्कूलों में आगजनी का विरोध जताया है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस तो सीधे तौर पर अलगाववादियों को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। घाटी के विभिन्न संगठनों की ओर से भी स्कूलों में आगजनी मामले पर चिंता जताई जा चुकी है।

माना जा रहा है इसी दबाव की वजह से अलगाववादियों को अपने बंद के नये कैलेंडर में स्कूल सुरक्षा दिवस का कार्यक्रम शामिल करना पड़ा।
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