कश्मीर घाटी में 12 दिनों से प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे अलगाववादी संगठनों ने सत्तारूढ़ पीडीपी के विधायकों से 'सच्चाई के समर्थन में' मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का साथ छोड़ देने और 'अपने लोगों के पास लौट आने' का आह्वान किया।
साथ ही अलगाववादियों ने आरोप लागाए कि, हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की हत्या से कश्मीर में भड़क हिंसा के बाद सभी पार्टियों के विधायक छुपे हुए हैं। किसी भी पार्टी का कोई भी विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में अपने लोगों का हाल लेने नहीं गया। वहीं तीन दिन पहले विरोध प्रदर्शन में घायल हुए पीडीपी विधायक खलील बंद को सिविल अस्पताल में भर्ती ना करवाकर सेना के बेस हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है।
सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक ने ई-मेल के माध्यम से जारी एक संयुक्त बयान में कहा है कि , 'जिस तरह 2010 में उमर अब्दुल्ला विफल रहे, उसी तरह इस समय महबूबा मुफ्ती भी विफल हुई हैं, ऐसे में उनके विधायकों को उनका साथ छोड़ देना चाहिए और अपने लोगों के पास लौट जाना चाहिए।'
अलगाववादी नेताओं ने विधायकों से 'लोगों के दमनकर्ताओं और हत्यारों के निष्ठावान प्रतिनिधि बने रहना' छोड़ देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के अन्य दलों के विधायकों को भी ऐसा ही करना चाहिए।