कश्मीर की डाचीगाम नेशनल पार्क में विश्व प्रसिद्ध कश्मीरी हिरण (हंगुल) सहित अन्य वन्य जीव प्रजातियों की सुरक्षा को गश्त चलाई जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से अधिकारियों और सुरक्षा गार्ड सहित विशेषज्ञों की टीमें बनाई गई हैं।
रोटेशन में ये टीमें एक हजार से अधिक किलोमीटर वर्ग वाले पार्क की हर रोज गश्त करेंगी, ताकि वन्य प्राणियों के शिकार पर रोक लगाई जा सके। पार्क और सेंट्रल कश्मीर के रीजनल वार्डन ताहिर शाल ने इसकी जानकारी दी है।
यूरोप में पाए जाने वाले रेड डियर की बहन कहे जाने वाले हंगुल सिर्फ कश्मीर में पाए जाते हैं। रेड डाटा बुक आफ इंटरनेशनल यूनियन फार कंजरवेशन आफ नेचर में रियासत की 14 वन्यजीव प्रजातियों की सूची शामिल हैं।
यह प्रजातियां खतरे में फंसी हुई हैं, जबकि तीन प्रजातियां ज्यादा खतरे में फंसी हैं। इनमें हंगुल भी शामिल हैं। बाकी ब्लैक नेक्ड क्रेन और मरखोर शामिल हैं। रीजनल वार्डन ताहिर शाल का कहना है कि विभाग ने 30 टीमों का गठन किया है। हर एक टीम में आधा दर्जन लोग शामिल हैं।
इनमें रेंज अधिकारी, फारेस्ट गार्ड, वन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। ये टीमें रोटेशन में पूरी पार्क की गश्त करेंगी, ताकि हंगुल सहित अन्य प्रजातियों के शिकार और इनकी तस्करी पर रोक लगाई जा सके।
हालिया सर्वे के मुताबिक हंगुल की संख्या पार्क में करीब 200 है। पार्क में 200 से अधिक प्रजातियों के पशु-पक्षी रहते हैं। इन सबका संरक्षण करने के लिए गश्त कराने का निर्णय लिया गया है।