सचिवालय के अफसरों की तर्ज पर हाईकोर्ट के जजों के सचिवों को केएएस श्रेणी में लाने के संबंध में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने सीनियर एएजी को दो सप्ताह के अंदर इस संबंध में व्यापक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट में तैनात सचिवों ने याचिका में कहा कि सचिवालय में कार्यरत उनके समकक्ष अफसरों को सरकार ने एसआरओ 386/2008 के तहत केएएस का दर्जा दे दिया लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने पाया कि कानून एवं न्याय विभाग की ओर से इस संबंध में एफिडेविट फाइल की गई थी। इसमें कहा गया कि रजिस्ट्रार जनरल ने याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व 28 मई, 2012 को भेजा गया था, जिसे 12 मार्च, 2013 को तत्कालीन सचिव कानून को दे दिया गया था।
अदालत ने कहा कि यह समझ से परे है कि 28 मई, 2012 को भेजी गई रिपोर्ट मार्च, 2013 तक सचिव ने क्यों नहीं प्राप्त की। सीनियर एएजी ने अदालत में कहा कि वह स्वयं मामले को न सिर्फ कानून सचिव को सौंपेंगे, बल्कि जीएडी के समक्ष भी उठाएंगे। अदालत ने उन्हें कहा कि दो सप्ताह के अंदर रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।