सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। इस संबंध में पिछली सरकार द्वारा उठाए गए कदम अब सवालों के घेरे में हैं। मामला स्कूलों के अपग्रेडेशन से जुड़ा हुआ है। जिले में कई ऐसे स्कूल हैं, जिनको अपग्रेड करने का उद्घाटन पूर्व सरकार के मंत्रियों ने किया था, लेकिन सत्र खत्म होने के साथ ही यह सब ढकोसला साबित हुआ है। इस तरह का एक मामला लेकर सोमवार को अमाला गांव के लोग जिला सचिवालय में मुख्य शिक्षा अधिकारी से मिले।
चौंकाने वाली बात यह है कि विभागीय अधिकारियों को इन स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए कोई आदेश ही नहीं मिला था। स्थानीय लोग बार-बार एक ही रट लगाए हुए थे कि मंत्री जी ने उनके साथ विश्वासघात किया है। सोमवार को मुख्य शिक्षा अधिकारी से मिलने के बाद अमाला गांव के लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि मंत्री जी ने उनके साथ विश्वासघात किया है।
शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे पूर्व जिला महासचिव अशोक जसरोटिया ने बताया कि 27 मार्च 2014 को सरकार के आदेश से रमसा योजना के तहत अमाल के स्कूल को हाई स्कूल बनाने की मंजूरी मिली थी, इसके बाद 17 सितंबर 2014 को तत्कालीन सहकारिता मंत्री डॉ. मनोहर शर्मा ने गांव पहुंचकर स्कूल को अपग्रेड कर हाई स्कूल का उद्घाटन भी किया गया।
उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि नया सत्र शुरू होने पर जब अभिभावक स्कूल में नौवीं कक्षा में बच्चों का दाखिला करवाने पहुंचे, तो मामला कुछ और ही निकला। मंत्री ने हवा में ही स्कूल को अपग्रेड कर दिया था। स्कूलों को अपग्रेड करने की न तो कागजी कार्रवाई पूरी की गई थी और न ही स्टाफ तैनात किए गए। लोगों ने बताया कि अब बच्चों को कई किलोमीटर दूर दूसरे स्कूल में दाखिला लेना पडे़गा।
शिष्टमंडल में शामिल ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस साल स्कूल में नौवीं की कक्षा को नहीं शुरू किया गया, तो पूरे क्षेत्र के ग्रामीण सड़क पर उतर कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। शिष्टमंडल में अमाला, धलौटी और घरनैडी के ग्रामीणों के अलावा पंच धरेंतर सिंह, कालीदास, सागर सिंह पठानिया, कुलजीत सिंह, हरदेव सिंह, पूर्णचंद शर्मा आदि शामिल रहे।