कश्मीर में सरपंचों की हत्या के मामले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। शनिवार सुबह को आतंकियों ने एक और सरपंच की गोलीमार कर हत्या कर दी।
सोपोर के बोमई गांव के सरपंच गुलाम मोहम्मद भट्ट को आतंकियों ने उनके घर के बाहर ही गोलियों से भून दिया। भट्ट कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
सोपोर में सरपंच गुलाम मोहम्मद भट्ट को आतंकियों ने उनके घर के बाहर ही गोलियों से छलनी कर दिया। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने सरपंच को चुनावों से दूर रहने को कहा था लेकिन सरपंच ने उनकी बात नहीं मानी।
बता दें कि इससे पहले भी सोपोर में नेशनल कांफ्रेंस से जुड़े दो सरपंचों की हत्या हो चुकी है जबकि एक को आतंकियों ने बुरी तरह घायल कर दिया था।
12 दिसंबर को गुलाम मोहम्मद मीर
इससे पहले 12 दिसंबर की रात जम्मू कश्मीर के सोपोर में एक अन्य सरपंच को अगवा करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई। गुलाम मोहम्मद मीर (62) नाम के इस सरपंच की हत्या संदिग्ध आतंकियों ने की।
पुलिस के मुताबिक सोपोर के तारजू गांव से पांच-छह अज्ञात बंदूकधारियों ने सरपंच को अगवा किया और फिर उनकी हत्या कर दी। सरपंच के अगवा किए जाने के बाद इलाके में सिक्योरिटी फोर्सेज ने तलाशी अभियान चलाया था, लेकिन सुबह उन्हें सरपंच का शव मिला।
पुलिस ने बताया कि गुलाम मोहम्मद मीर का शव सोपोर शहर के शलाबुग इलाके में एक खेत से बरामद किया गया। इस इलाके में लश्कर ए तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी सक्रिय हैं।
लगातार दो सरपंचों को बनाया निशाना
एक दिसंबर को भी शोपियां में एक सरपंच को गोली मार कर जख्मी किया गया था। सरपंच शिराज अहमद बट ने एक दिसंबर को ही नेशनल कांफ्रेंस छोड़कर पीडीपी ज्वाइन की थी। भट को पहले पुलवामा के एक अस्पताल ले जाया गया पर गंभीर हालत होने की वजह से उन्हें श्रीनगर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इससे एक दिन पहले शोपियां के नाजनीनपोरा के पास 30 नवंबर की रात सवा नौ बजे स्वचालित हथियारों से लैस आतंकियों ने सरपंच मुहम्मद सुल्तान को रोका। मुहम्मद सुल्तान उस समय अपनी कार में किसी जगह एक चुनावी सभा से घर की तरफ आ रहे थे। सड़क पर अंधेरा होने के कारण उसने कथित तौर पर आतंकियों को सुरक्षाकर्मी समझ, कार रोक ली।
जब तक वह असलियत समझ पाते, आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी और वहां से भाग निकले। यह हादसा सरपंच के घर से कुछ ही दूरी पर हुआ। गोलियों की आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों और सुरक्षाकर्मियों ने उसे निकटवर्ती अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत लाया घोषित कर दिया। सुल्तान नेशनल कांफ्रेंस से जुड़े हुए थे।