सांबा के लोग पाकिस्तान की आर्थिक नाकामी और भारत विरोधी नीतियों पर गुस्सा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि वे आधा पेट खाकर भी पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने के लिए तैयार हैं।
बम और गोलियों के धमाकों के बीच ही हमारी पैदाइश है। पाकिस्तान जितने लंबे समय से हमें लहूलुहान कर रहा है, उसके लिए हम किसी भी तरह का बलिदान देने को तैयार हैं। मगर इस बार उसे हर हाल में ऐसा सबक सिखाना जरूरी है, जो उसकी आने वाली नस्लों के लिए नजीर बन जाए।
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संवाद ने सांबा के जीरो लाइन पर बसे गांव बैनग्लाड और कड़गाल का दौरा किया तो लोगों ने कुछ इसी तरह के उद्गार व्यक्त किए। कहा कि इस समय पाकिस्तान विदेशों में काम कर रहे अपने अधिकारियों को सैलरी भी नहीं दे पा रहा। ऐसे दयनीय हालत में पहुंच चुके पाकिस्तान के हुक्मरानों की सत्ता केवल भारत विरोध पर टिकी है।
पाकिस्तान को सबक सिखाने का यही सही वक्त है। उन्होंने कहा, आधा पेट खाएंगे पर पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे। कुछ पढ़े-लिखे और प्रतियोगी सेवाओं की तैयारी करने वाले युवकों ने कहा कि पाकिस्तान का हर बच्चा इस वक्त अपने सिर पर लगभग एक लाख का कर्ज लेकर पैदा होता है। तेल और गैस का इंपोर्ट बिल हो या सैलरी और सब्सिडी जैसे रोजमर्रा के खर्च, पाकिस्तान की पूरी इकोनॉमी ही कर्ज पर चल रही है।