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Jammu News: हवा में जहर घोल रहा कारखानों का धुआं

Mon, 27 Oct 2025 01:31 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
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सांबा के औद्योगिक क्षेत्र में रसायनिक फैक्ट्री की चिमनी से निगलता धुंआ
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मंधेरा गुज्जर बस्ती में रासायनिक तत्वों की अत्यधिक मात्रा से भूमिगत जल हो चुका है दूषित
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बुर्ज टांडा में मिट्टी की उर्वरता कम होने से 150 किसान नहीं कर पा रहे सब्जी की
विशाल जसरोटिया
सांबा। औद्योगिक इलाके में कीटनाशक, रसायन, दवा और सीमेंट फैक्ट्रियां विकास को रफ्तार तो दे रही हैं, लेकिन इनके कचरे का निस्तारण सही से नहीं होना सांबा जिले के लोगों पर भारी पड़ रहा है। इकाइयों से निकलने वाला धुआं, रासायनिक अपशिष्ट और धूल कण यहां की हवा, मिट्टी और पानी में धीमा जहर घोल रहे हैं। लोग बीमार हो रहे हैं। बता दें कि सर्दी में धुएं के कण वायुमंडल में ऊपर न जाकर वातावरण की नमी में मिलकर धुंध का रूप लेकर जमीन के नजदीकी क्षेत्र में आ जाते हैं जो सांस लेने में दिक्कत महसूस कराते हैं।
मंधेरा गुज्जर बस्ती गांव का पानी घातक रासायनिक तत्वों की अत्यधिक मात्रा के चलते पूरी तरह से अयोग्य घोषित किया जा चुका है। इस गांव के लोगों भूमिगत पानी नहीं पीने की चेतावनी दी जा चुकी है। लोगों का कहना है कि शायद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की नजर भी इस घातक धुएं से धुंधली हो गई है तभी तो जहर उगल रहे कारखानों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। विभाग और विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता से स्थिति और भी गंभीर होती नजर आ रही है।
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जिला औद्योगिक केंद्र से मिले आंकड़ों के अनुसार सांबा के औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 250 छोटे बड़े कारखाने हैं। इनमें 18 कीटनाशक, 15 सीमेंट, 9 फार्मास्यूटिकल (थोक दवा), 15 रसायन, 20 प्लास्टिक व रबर और 15 धातु बनाने के कारखाने भी हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि ये कारखाने से निकलने वाले अपशिष्ट का बिना उचित उपचार किए इसे बसंतर नदी और अन्य जल स्रोतों में बहा रहे हैं। इससे जल और मृदा प्रदूषण के साथ साथ हवा भी जहरीली हो रही है। इन कारखानों पर निगरानी करने के लिए कोई मजबूत तंत्र नहीं है जिससे प्रदूषण की समस्या सांबा में विकराल रूप धारण करती जा रही है। संवाद

10 साल में 30 प्रतिशत बढ़ गए मरीज
स्थानीय अस्पतालों के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले 10 वर्षों में सांस की बीमारियों, त्वचा रोगों, ट्यूमर और कैंसर जैसे गंभीर मामले लगभग 30 प्रतिशत बढ़ गए हैं। सामान्य चिकित्सक और आहार विशेषज्ञ डॉक्टर विनय संब्याल के अनुसार सांबा में बीते कुछ वर्षों में सांस की बीमारियों, त्वचा रोग, ट्यूमर और कैंसर जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण और खानपान है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व प्रशासन शिकायतों के बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा।

जिले में प्रदूषण की जांच के लिए कोई लैब नहीं
जिले में हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण स्तर की जांच करने के लिए कोई सरकारी लैब नहीं है। जिला प्रदूषण विभाग के अनुसार सांबा में औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की जांच के एकत्रित नमूनों को जम्मू भेजा जाता है। सैंपल की रिपोर्ट की अगर किसी को जानकारी चाहिए हो तो उन्हें जम्मू विभाग की लैबोरेटरी से जानकारी उपलब्ध होगी।

सैंपल की कोई भी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं
-सामाजिक कार्यकर्ता रविंदर सिंह का कहना है कि हैरत की बात है सांबा से एकत्रित सैंपल की कोई भी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। सांबा में हवा, पानी, भूमि और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है लेकिन प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कहीं कोई प्रभावी भूमिका नजर नहीं आ रही है।
-चक मंगा गांव के कुलदीप कुमार ने बताया कि रात के समय कई फैक्ट्रियां धुआं छोड़ती हैं ताकि धुएं का पता न चल सके। औद्योगिक क्षेत्र के अंतिम छोर पर बसंतर नदी है और इसी के साथ सटे क्षेत्र में कारखानों से निकला रसायन युक्त अपशिष्ट फेंका जाता है। इसे यहीं जलाया भी जाता है। इसकी दुर्गंध और काला धुएं में लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
-बुर्ज टांडा के पूर्व सरपंच तारी सिंह का कहना है कि सांबा में फैक्ट्रियां लगने से पहले उनकी पंचायत के लगभग आधा दर्जन गांवों के किसान सब्जी की फसल उगाकर अपनी आजीविका चलते थे लेकिन जहरीले पानी ने उनकी खेती बाड़ी छीन ली। आज लगभग 150 किसान सब्जी उगाने से वंचित होकर बेकार बैठे हैं। इसके अलावा गांव में कई लोग श्वास, चर्म रोग और कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
-सांबा के औद्योगिक क्षेत्र के साथ सटे मंधेरा बस्ती के नेक मोहम्मद ने बताया कि उनके गांव में लगभग हर घर में हैंडपंप है। दो साल पहले जल शक्ति विभाग ने जब यहां ट्यूबवेल बनाया तो पता चला कि उनके क्षेत्र में भूमिगत जल में हानिकारक रासायनिक तत्वों की मात्रा अत्यधिक ज्यादा है। इसलिए इस पानी को पीने से मना किया गया। ट्यूबवेल भी बंद कर दिया गया।
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हिदायत जारी कर होता है निरीक्षण : अधिकारी
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के जिला अधिकारी हंसराज गलौच ने कहा कि विभाग समय-समय पर हिदायत जारी कर निरीक्षण करता है। प्रदूषण की जांच के लिए उनके विभाग की तरफ से सैंपल लेकर जांच के लिए जम्मू भेजे जाते हैं। सैंपलों के नतीजों के सवाल का जवाब टालते हुए उन्होंने इसके लिए जम्मू लेबोरेटरी से संपर्क करने की बात कहने लगे।

सांबा के औद्योगिक क्षेत्र में रसायनिक फैक्ट्री की चिमनी से निगलता धुंआ

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