जम्मू कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को फिर बिजली संकट का मुद्दा छाया रहा। विपक्षी सदस्यों नेकां और कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। सरकार के जवाब से संतुष्ट न होने के बाद नेकां-कांग्रेस सदस्यों ने वाकआउट किया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेकां के अली मोहम्मद सागर ने यह मामला उठाते हुए कहा कि सरकार घाटी तथा लद्दाख में नियमित बिजली आपूर्ति में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड में जबरदस्त बिजली संकट है। अनियमित कटौती भी की जा रही है।
कांग्रेस के नवांग रिगजिन जोरा ने भी समर्थन करते हुए कहा कि सरकार प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय करने में विफल रही है, ताकि हालात को काबू में किया जा सके। इसके बाद पूरे विपक्ष ने सीट से खड़े होकर विरोध करना शुरू कर दिया। इस दौरान हस्तक्षेप करते हुए बिजली राज्य मंत्री फारूक अंद्राबी ने कहा कि यह सही है कि बिजली कटौती हो रही है। मांग और आपूर्ति में भारी अंतर होने की वजह से ऐसा हो रहा है।
विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए किया वॉकआउट
विधानसभा से विपक्ष का वॉकआउट
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मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल तक पहुंच गए। कुछ देर तक हंगामा चलता रहा तो संसदीय कार्य मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदस्यों ने जोे मुद्दा उठाया है, वह उचित है। प्रशासन को यह हिदायत दी गई है कि वह नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास करे तथा इस दिशा में आने वाली बाधाओं को दूर करे।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भीषण ठंड में भी लोगों को कटौती का सामना करना पड़ रहा है। सर्दियों में बिजली की खपत बढ़ जाती है। सरकार चाहती है कि सुचारु आपूर्ति हो, लेकिन चाहकर भी यह संभव नहीं है, क्योंकि नियमित आपूर्ति के लिए ढांचा नहीं है। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए वाकआउट कर दिया।
बाद में जोरा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सरकार ने बर्फबारी के बाद उत्पन्न हालात से निबटने के लिए पूरी तैयारी नहीं कर रखी है। इसके चलते कश्मीर तथा लद्दाख में भारी बिजली संकट है। सरकार सुचारु आपूर्ति कराने में पूरी तरह विफल है।