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RSS गोरक्षा के संकल्प पर कायम, हिंसा पर मोदी के स्टैंड को दिया समर्थन

Fri, 21 Jul 2017 12:10 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
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मोहन भागवत - फोटो : SELF
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ गोरक्षा के अपने संकल्प पर कायम है लेकिन इसकी आड़ में समाज में हो रही हिंसा पर विरोध जताया है। संघ का मानना है कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा से इस महत्वपूर्ण अभियान को बदनामी मिलती है। दूसरी ओर सभी गोरक्षकों को उपद्रवी बताने और इस मुद्दे पर सियासत को भी संघ गलत मानता है।
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संघ की मान्यता है कि पूरे देश में लाखों लोग शांतिपूर्ण तरीके से आस्था और वैज्ञानिक आधार पर गोरक्षा की मुहिम चला रहे हैं। इस अभियान को गति देने की जरूरत है। संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने के स्टैंड को समर्थन दिया है। 

जम्मू में तीन दिन से चल रही संघ की प्रांत प्रचारक बैठक में गोरक्षा पर विस्तृत चर्चा के बाद इस अभियान को गति देने के लिए कार्यक्रम तय किए गए। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि संघ के कार्यकारी मंडल की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत कार्यक्रम तय किए जाएंगे। 
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भोपाल में होगी कार्यकारी मंडल की बैठक

मोहन भागवत - फोटो : फाइल फोटो
संघ के कार्यकारी मंडल की बैठक 12 से 14 अक्टूबर तक भोपाल में होना तय हुआ है। संघ अधिकारी ने कहा कि देशी गाय के दूध की विशेष गुणवत्ता की वैज्ञानिकों ने भी पुष्टि की है। गोमूत्र और गोबर के औषधीय गुण भी प्रमाणित हो चुके हैं।

इसलिए संघ ने देश भर में देशी गायों के नस्ल सुधार और विकास के लिए 1000 गो संसाधन केंद्र चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान में गौशालाओं के विकास के लिए भी कार्यक्रम तय किए जाएंगे। 

वर्तमान में भाजपा शासित पूर्वोत्तर राज्यों में गोहत्या बंद करने के सख्त कानून नहीं हैं। पश्चिम बंगाल और केरल में संघ और भाजपा अपना आधार बढ़ाने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। इन राज्यों में भी गोहत्या पर प्रतिबंध के कानून नहीं हैं। जबकि हिमाचल जैसे कांग्रेस शासित राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध है।
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गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने का जोर

मोहन भागवत - फोटो : फाइल फोटो
संघ प्रत्येक राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध के लिए कड़ा कानून बनाए जाने का पक्षधर है। मनमोहन वैद्य के अनुसार संघ किसी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता है। गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा भी निंदनीय है। किसी समाज को इसके लिए बदनाम नहीं किया जा सकता। हर घटना की विस्तृत जांच जरूरी है। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई भी हो। इस गंभीर विषय पर सियासत ठीक नहीं है।  

संघ ने नदियों के संरक्षण पर अभियान को समर्थन दिया है। अब कई नदियों में सिर्फ बरसात में पानी रहता है और अन्य महीनों में नदियां सूख जाती हैं। इसके लिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक जागृति अभियान चलाया जाएगा। नदी किनारे वृक्ष लगाने का अभियान चलेगा। अभियान में तकनीकी विशेषज्ञ जोड़े जाएंगे। इससे संबंधित एक यात्रा निकलेगी जो 2 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेगी। 
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