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रिहाई पर रार, तोगड़िया ने उगली आग

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कट्टर अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई से उपजे तूफान ने भाजपा-पीडीपी गठबंधन की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। पहले पाकिस्तान का गुणगान, फिर अफजल और अब मसर्रत मुद्दे के बाद सबसे विकट स्थिति भाजपा की है जिसकी हालत इधर कुंआ उधर खाई वाली हो गई है।
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फिलहाल पार्टी कोई सख्त फैसला लेने के मूड में नहीं लग रही। रविवार को भाजपा ने आपात बैठक बुलाकर पीडीपी पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम की हद से बाहर जाकर फैसला करने का आरोप लगाया। भाजपा ने पीडीपी से इस पर जवाब भी मांगा है।

कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस की ओर से भी मसर्रत आलम की रिहाई को लेकर भाजपा-पीडीपी गठबंधन पर जबरदस्त हमले किए जा रहे हैं। पैंथर्स पार्टी रिहाई के विरोध में रविवार और सोमवार को जम्मू बंद का आह्वान किया। पैंथर्स सुप्रीमो भीमसिंह ने संघ से भी जनता के सामने अपना पक्ष ख्राने की मांग की है।
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रविवार को जम्मू पहुंचे विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगाड़िया ने मुफ्ती को राष्ट्रविरोधी और पाकिस्तान परस्त करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि मुफ्ती अपनी नीतियों से बाज नहीं आए तो उन्हें कुर्सी पर बैठाने वाले कान पकड़ कर कुर्सी से उतार देंगे।
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'रिहाई से सीएमपी का उल्लंघन नहीं'

इन सबके बीच मसर्रत आलम ने भी हुर्रियत की गतिविधियां तेज किए जाने का संकेत दिया। आलम ने कहा कि सरकार ने मुझे रिहा कर कोई अहसान नहीं किया है। मेरी रिहाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। मसर्रत ने कहा कि संबंधित अदालतों से भी उसे जमानत दे दी गई थी।

भाजपा ने पीडीपी को चेतावनी दी है कि अगर रियासत में साझा सरकार को चलाना है तो उसे गठबंधन धर्म को निभाना होगा। पीडीपी की ओर से लगातार विवादित बयानबाजी और फैसले किए जाने के बाद गठबंधन के भविष्य पर पूछे जाने पर उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने श्रीनगर में कहा कि पीडीपी से विरोध जताया जाएगा।

हालांकि, गंठबंधन पर उनका कहना था कि इस संबंध में फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेना है। पीडीपी अपने रुख पर अड़ी है। पार्टी के प्रवक्ता एवं शिक्षा मंत्री नईम अख्तर का कहना है कि मसर्रत को रिहा कर पीडीपी ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन नहीं किया है।

उनका कहना है कि साझा कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया है कि कश्मीर में हालात सामान्य बनाने के लिए हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं से वार्ता की जाएगी। नईम अख्तर का कहना था कि किसी को जेल में बंद रखकर उसे वार्ता में शामिल नहीं किया जा सकता।
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