रोशनी घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने कोर्ट में बताया है कि राजस्व विभाग उनको जांच में सहयोग नहीं कर रहा। सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने ऐसा इसलिए कहा है, क्योंकि 17 में से 5 एफआईआर के चालान लगभग तैयार हैं, लेकिन इसमें कुछ जानकारियां ऐसी हैं, जो राजस्व विभाग के अधिकारी देने से आनाकानी कर रहे हैं। विभाग के कुछ अफसरों और कर्मियों को सीबीआई के पास बयान दर्ज कराने हैं, जो नहीं हो रहे। यहीं कारण है कि मामलों की जांच सही तरह से नहीं हो पा रही।
जानकारी के अनुसार इस जांच में 6 से 7 आईएएस अफसरों की संलप्तिता भी सामने आ रही है। इन पर जल्द ही शिकंजा कसा जा सकता है। इसमें कुछ पूर्व और कुछ अन्य जगहों पर तैनात हैं। सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि कोर्ट में हमारी तरफ से बता दिया गया है कि राजस्व विभाग की ओर से उनको जांच में सहयोग नहीं मिल पा रहा। कोर्ट की ओर से अब किस तरह की हिदायतें विभाग को जाती हैं, इसका इंतजार कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें- कोरोना का कहर: तीसरी लहर की ओर बढ़ रहा जम्मू-कश्मीर, सामाजिक दूरी का पालन न होने से संक्रमण बढ़ने की आशंका
बहरहाल, कुछ लोगों के नाम राजस्व विभाग को बताए गए हैं, जिनका फिर से ब्यौरा मांगा गया है। बता दें कि रोशनी योजना में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उनके श्रीनगर स्थित कार्यालय, पूर्व मंत्री लाल सिंह, अब्दुल गनी कोहली, पूर्व मंत्री रमण भल्ला आदि का नाम सामने आ चुका है। राजस्व विभाग की ओर से इनके नामों को सार्वजनिक भी किया गया था। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की सरकार के वक्त रोशनी योजना लाई गई थी।