बाढ़ के बाद महामारी जैसी स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सक्रियता बढ़ा दी है। इसके लिए जागरूकता बढ़ाने के साथ सर्विलांस चिकित्सा टीमें अपने अपने क्षेत्रों में काम करेंगी।
जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए पंचों-सरपंचों की मदद ली जाएगी। बाढ़ के बाद उत्पन्न हुई स्थिति को देखते हुए पहले ही स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों की छुट्टियां रद करके सभी दस जिलों में ड्यूटी पर तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार सभी जिलों में जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी से पनपने वाली बीमारियों की रोकथाम पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, टायफायड, पीलिया, मलेरिया और डिसेंट्री (उल्टीदस्त) जैसे रोगों के पनपने की आशंका बढ़ गई है। संभाग के अधिकांश जिलों के लोग प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं। लेकिन बाढ़ और मूसलाधार बारिश के कारण अधिकांश जगहों पर पानी दूषित हो चुका है।
इसमें कीचड़ और अन्य दूसरी गंदगी बहकर आई है। अभी भी कई प्रभावित इलाकों में बाढ़ और बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाई है। इससे मलेरिया फैलने की ज्यादा आशंका है। प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी दवाइयों की सप्लाई के साथ जागरूकता बढ़ाने के लिए आशा वर्करों की सेवाएं ली जा रही हैं।
इसके अलावा प्रभावित क्षेत्र में सभी सीएमओ और बीएमओ के टेलीफोन नंबरों से कोई भी आपात जानकारी दी जा सकती है। इसमें खासकर महामारी के लिए पनपने वाली बीमारियों की तुरंत जानकारी देने का आह्वान किया गया है।
मौसम के मिजाज में उतार चढ़ाव के जारी रहने के कारण सभी एहतियात बरते जा रहे हैं। इसके अलावा बाढ़ पीड़ित कैंपों में अलग से टीमें काम कर रही हैं।