राज्य में सरकार गठन में हो रही देरी पर नेकां संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पीडीपी और भाजपा को ही इस पर फैसला लेना है। जनता ने उन्हें नुमाइंदगी दी है।
दोनों दलों को बैठक कर इस बाबत जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए, ताकि राजनीतिक संकट और गतिरोध दोनों खत्म हो सकें। बीते दिन पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती से श्रीनगर में मुलाकात के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह केवल शोक प्रकट करने गए थे।
उन्होंने कहा कि जब मैं इंग्लैंड में इलाज करवाकर लौटा था तो मुफ्ती मोहम्मद सईद विशेष रूप से मिलने आए थे। मानवीय आधार पर इस दफा मैं महबूबा से मिलने चला गया।
डा. फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में वापसी करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय आ चुका है, जब कश्मीरी पंडितों को बिना समय गंवाए अपने घरों में सम्मान और गरिमा के साथ वापसी करनी चाहिए।
कोई भी उन्हें घर वापसी के लिए बुलाने नहीं आएगा। उन्हें खुद वापसी करनी चाहिए, क्योंकि कश्मीर में उनका इंतजार किया जा रहा है।
डा. फारूक ने कहा वर्ष 1996 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से वह खुद कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए संघर्षरत रहे, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई।