अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डोगरी एवं कश्मीरी भाषा संघ ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया। इस अवसर पर केेएल सहगल हॉल में साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। समारोह में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। बता दें कि भाषा संघ ने पहली बार दोनों संभागों की मूल भाषाओं में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अदबी मरकज कामराज के अध्यक्ष और साहित्य अकादमी में कश्मीरी भाषा के सदस्य मोहम्मद अमीन भट्ट ने दुनिया भर के लोगों में मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव के कुछ उदाहरण पेश किए और मातृभाषा को हर किसी के लिए गर्व का विषय बताया।
मशहूर कश्मीरी लेखक प्रो. रतन तलाशी ने कश्मीरी भाषा के इतिहास और वर्तमान परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए। साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक खजूरिया ने उपस्थित लोगों को मातृभाषा के महत्व से अवगत कराते हुए डोगरी भाषा में ‘डोगरी की उत्पत्ति और विकास’ पर विस्तार से जानकारी दी।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों की मुख्य भाषाओं को एक साथ रखके कोई कार्यक्रम हो रहा है। इससे दोनों संभागों के लोगों में एकता की भावना और भी बढ़ेगी। इस दौरान उन्होंने दोनों भाषाओं के विकास के लिए हर संभव प्रयास करने का आश्वासन भी दिया।
समारोह के दौरान शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक शुभा मेहता और जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की सचिव हरविंदर कौर भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
इनके साथ ही दूरदर्शन एवं आकाशवाणी जम्मू की निदेशक रेणु रैना, पद्मश्री मोहन सिंह सलाथिया, जम्मू विश्वविद्यालय में डोगरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. पदमदेव सिंह, डोगरी जेकेएएसीएल की संपादक रीता खडयाल भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता डॉ. आशु शर्मा और अंजेर अली ने किया। अंत में साहिल बडयाल ने सभी मौजूद लोगों का आभार व्यक्त किया।