जेएंडके अंडर रिजर्वेशन एक्ट के नियम 17 को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अतर और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने याचिका को बंद कर दिया।
अशोक शर्मा की ओर से दायर याचिका पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि याची की दलील या उसकी चिंता नियम के बारे में गलत धारणा उत्पन्न करती है।
नियम 17 के तहत आरक्षित वर्ग के लिए अनुमेय सीमा से परे आरक्षित सीटों की संख्या में वृद्धि नहीं की जा सकती। नियम 17 के तहत मिलने वाले आरक्षण का ओपन मेरिट या अन्य आरक्षित वर्ग के लिए उपलब्ध सीटों से कोई लेना-देना नहीं है।
आरक्षित वर्ग से संबंधित व्यक्ति यदि ओपन मेरिट में सीट हासिल करने में सफल होता है, तो वह विषय या वह कालेज चुनने का हकदार होगा, जो आरक्षण वर्ग में उसे मिल सकती है।
यूं कहा जाए कि ओपन मेरिट में चुने जाने के बाद मिलने वाले विषय या कालेज के अलावा वह आरक्षित वर्ग में चुने जाने के बाद मिलने वाले विषय या कालेज में से एक को चुन सकता है।
ओपन मेरिट में चुने जाने के बाद यदि वह आरक्षित वर्ग का विषय या कालेज चुनता है, तो उसके स्थान पर ओपन मेरिट वाला विषय या कालेज आरक्षित वर्ग वाले छात्र को मिलना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है कि नियम 17 से आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ेगी। याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गए मुद्दे की उसे पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए याचिका को बंद किया जाता है।