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आज महिलाएं बछदुआ रखकर संतान की लंबी आयु की करेंगी कामना

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जम्मू। कोरोना महामारी के कारण जारी हिदायतों के चलते शहर में बच्छदुआ (वत्स द्वादशी) का त्योहार भी घरों में रहकर मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं बच्चों की लंबी उम्र और सुख की कामना करते हुए व्रत करेंगी। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को बच्छदुआ के रूप में मनाया जाता है। सामान्य तौर पर हर साल महिलाएं मंदिरों में या जलस्रोत के किनारे जाकर पूजा करती थीं। मगर इस साल मंदिरों के द्वार बंद हैं। ऐसे में घर पर रहकर ही पूजा की जाएगी।
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वत्स द्वादशी का व्रत संतान प्राप्ति एवं संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए किया जाता है। इस दिन अंकुरित मोठ, मूंग और चने आदि को भोजन में उपयोग किया जाता है और प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।
इस दिन दूध देने वाली गाय और बछडे़ को स्नान कराकर नया वस्त्र ओढ़ाते हैं। गले में फूलों की माला पहनाकर माथे पर चंदन का तिलक लगाते हैं। सींगों को मढ़कर, तांबे के पात्र में सुगंध, अक्षत, तिल, जल और फूलों को मिलाकर मंत्रोच्चारण करते हुए गो का प्रक्षालन किया जाता है। जिन लोगों के घर के आसपास गाय और बछड़ा नहीं होते वह मिट्टी या आटे से गाय व बछडे़ की आकृतियां बनाकर उनकी पूजा करते हैं। गौ पूजन के बाद वत्स द्वादशी की कथा सुनी जाती है। सारा दिन व्रत रखकर पूजा करने के बाद इष्टदेव और गो माता की आरती की जाती है। व्रत में गाय के दूध से बनी खाद्य सामग्री का उपभोग नहीं किया जाता।
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आज दोपहर 2.21 बजे के बाद हो सकता है पूजन
महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार द्वादशी तिथि 15 अगस्त शनिवार को दोपहर 02 बजकर 21 मिनट से शुरू होगी। इसके बाद महिलाएं वत्स द्वादशी का व्रत एवं पूजन कर सकती हैं।
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16 अगस्त को है प्रदोष व्रत
जम्मू संभाग में विशेष महत्व रखने वाली भाद्रपद संक्रांति 16 अगस्त रविवार को है। 16 अगस्त शाम 7.10 बजे सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। भाद्रपद संक्रांति का पुण्यकाल 16 अगस्त दोपहर 12.46 बजे के बाद शुरू होगा। इस दिन प्रदोष व्रत भी है। इस दिन पवित्र नदियों, सरोवर में स्नान एवं दान-पुण्य के लिए अच्छा माना गया है। इस दिन किया गया दान अन्य शुभ दिनों की तुलना में दस गुना अधिक पुण्य देने वाला होता है। कोरोना महामारी के चलते घर में पानी में गंगाजल डाल कर स्नान करें और घर के आस पास जरूरतमंद लोगों को यथासंभव दान करें।
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