ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर युवाओं ने चिल्ले कलां के पहले दिन को अंतरराष्ट्रीय फिरन दिवस के तौर पर मनाया। फिरन एक लंबी सी पारंपरिक गर्म पोशाक होती है जो अक्सर सर्दियों में घाटी के लोग पहनते हैं।
युवा जावेद बेग ने कहा कि कश्मीर के मौसम की खूबसूरती ही चिल्ले कलां है। इसकी आमद पर हम अंतरराष्ट्रीय फिरन दिवस मना रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस दिन को अंतरराष्ट्रीय फिरन दिवस के तौर पर स्वीकृत करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि फिरन हमारी संस्कृति का हिस्सा है। देश दुनिया में हमारी सांस्कृतिक पहचान ही इस फिरन से है। बेग ने कहा कि जो कोई भी चिल्ले कलां के 40 दिन यहां आए वो भी इस पहनावे को अपनाकर इसकी शान बढ़ाएं।