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जम्मू-कश्मीर में इस नए नियम के चलते बंद हुआ 22 गन फैक्ट्रियों का उत्पादन

Thu, 19 Jul 2018 12:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर में गन फैक्ट्रियों से उत्पादन बंद हो गया है। केंद्र सरकार ने फार्म नौ को बंद कर दिया है। इस कारण अब फैक्ट्री मालिकों को गन उत्पादन की अनुमति और ट्रांसपोर्ट लाइसेंस नहीं मिल पाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फैक्ट्री मालिकों को फार्म सात भरने के आदेश दिए थे। इसके लिए फैक्ट्री मालिकों को दो साल का वक्त दिया था। 
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आर्म्स एक्ट 1959 के तहत रूल में 17 जुलाई 2016 को आदेश जारी कर फार्म सात जमा कराने के आदेश दिए थे। 17 जुलाई 2018 को फार्म जमा कराने की अंतिम तारीख थी। नए फार्म सात में गन फैक्ट्री मालिकों को 19 औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। सूत्रों के अनुसार जम्मू कश्मीर स्थित किसी भी फैक्ट्री मालिक ने औपचारिकताएं दो साल में पूरी नहीं की हैं। उनका आवेदन केंद्रीय गृह विभाग में फंसा हुआ है।
  
केंद्रीय गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार ऐसे ही आदेश गन विक्रेताओं के लिए भी जारी किए हैं। उनके लिए अब फार्म तीन को हटाकर फार्म आठ कर दिया गया है। यह जम्मू कश्मीर गृह विभाग में जमा कराने हैं। उनकी भी वही औपचारिकताएं हैं, जो फैक्ट्री मालिकों के लिए हैं। इन औपचारिकताओं में किसी भी मालिक के खिलाफ कोई भी सिविल या क्रिमिनल केस नहीं होना चाहिए। बैंक एनओसी, टैक्स विभाग से एनओसी आदि जमा कराना अनिवार्य है। 
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सूत्रों के अनुसार जम्मू कश्मीर में शायद ही ऐसी कोई गन फैक्ट्री होगी, जिसका कोर्ट में केस नहीं चल रहा हो। कुछ मामलों में सीबीआई का केस भी फर्जी गन लाइसेंस मामले में कोर्ट में चल रहा है। फार्म हासिल करके आवेदन दिया गया है। फिलहाल किसी को भी फैक्ट्री से उत्पादन करने की अनुमति नहीं दी गई है। दो साल का समय पूरा होने के बाद इसकी मियाद खत्म हो गई है। किसी भी फैक्ट्री के उत्पादन को ट्रांसपोर्ट लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। हर गन को ट्रांसपोर्ट लाइसेंस डीसी कार्यालय से दिया जाता है। डीसी कार्यालय से लाइसेंस हासिल करके गन के कानपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री में भेजा जाता है, जहां गन की गुणवत्ता की जांच होती है और उसे वापस फैक्ट्री मालिकों को भेज दिया जाता है। विशेष कारगो से इन फैक्ट्री वालों की गन टेस्ट के लिए कानपुर भेजी जाती हैं।  

राज्य में हैं 22 गन फैक्ट्रियां 
जम्मू कश्मीर में 22 गन फैक्ट्रियां हैं। भार्गव आर्म्स कंपनी, खजूरिया आर्म्स, खालसा आर्म्स, उत्तम गन फैक्ट्री, नया कश्मीर सिंडिकेट, अमर वर्कशाप, संतोखू गन फैक्ट्री, स्टेंडर्ड आर्म्स कंपनी, हेमराज, कलसी, गोवर्धन आदि हैं। कश्मीर में दो गन फैक्ट्री हैं, जो बंद पड़ी हैं। जम्मू में भी कई गन फैक्ट्रियां बंद हैं।
  
एटीएस भी कसेगी शिकंजा 
राजस्थान की एटीएस भी जम्मू कश्मीर से जारी हुए फर्जी गन लाइसेंसों की जांच के लिए शिकंजा कसेगा। जम्मू कश्मीर राज्य गृह विभाग भी फर्जी गन लाइसेंस बनाने वालों के खिलाफ सक्रिय हो गया है। राज्य गृह विभाग के प्रधान सचिव सुरेश कुमार ने आठ जिलों से बने एक साल के गन लाइसेंस को रद्द कर दिया है। नवीनीकरण के लिए भी प्रावधानों पर अमल करने के जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिए हैं।  

बड़े विक्रेताओं पर भी नजर 
गन फैक्ट्री और बड़े गन विक्रेताओं पर भी सरकार नजर रखे हुए है। आर्म्स रूल के तहत एक ही परिवार के एक सदस्य को ही गन फैक्ट्री या आर्म्स विक्रेता लाइसेंस दिया जा सकता है। उन लोगों के खिलाफ भी शिकंजा का जाएगा, जिनके परिवार में एक से अधिक गन विक्रेता और गन फैक्ट्री के लाइसेंस हैं। सूत्रों के अनुसार एक बहुत बड़ा रैकेट प्रशासन के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है, जो फर्जी गन लाइसेंस बनाने में शामिल है। फर्जी गन लाइसेंस के भंडाफोड़ होने के बाद हालांकि छोटे विक्रेता भी प्रभावित हुए हैं। जो सही तरीके से काम करके अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं।
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