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'भारत-पाक LOC को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लें'

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जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान के सीमा विवाद को सुलाझाने के लिए एक सुझाव दिया है। उमर ने कहा है कि कश्मीर में यथास्थिति कायम रहना इसकी समस्या का हल नहीं है।
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नियंत्रण रेखा (एलओसी) को ऐसी अंतरराष्ट्रीय सीमा में तब्दील कर दिया जाना चाहिए जिसमें लोगों और सामानों की मुक्त आवाजाही की इजाजत हो। नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के छात्र समूह इंडिया डॉयलॉग की ओर से आयोजित 'द कश्मीर कॉन्क्लेव' को संबोधित कर रहे थे।

उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘एक बात तो तय है। यथास्थिति कायम रखना इसका समाधान नहीं है। यदि भारत लगातार यही कहता रहे कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के हिस्से को खाली कराना ही होगा और तब तक इसका कोई हल नहीं निकलेगा तथा पाकिस्तान इस बात पर जोर देता रहे कि जम्मू कश्मीर 1947 के बंटवारे का एक अधूरा एजेंडा है ,तो वे कहीं नहीं पहुंचने वाले।’
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दोनों राजधानियों में स्वार्थी तत्व

उमर ने कहा क‌ि, ‘किसी भी हल को अमल में लाने के लिए सबसे पहले हमें यह स्वीकार करना होगा कि दोनों ही देशों में भविष्य में किसी भी क्षेत्र का हस्तांतरण नहीं होगा। इसका मतलब है कि आपको नियंत्रण रेखा को मानना होगा और इसे (अंतरराष्ट्रीय) सीमा के तौर पर स्वीकार करना होगा।’

दोनों देशों के लिए उनके द्वारा द‌िए गए समाधान को मानना मुश्किल होगा क्योंकि दोनों राजधानियों में ऐसे निहित स्वार्थी तत्व हैं जो कश्मीर समस्या को एक समस्या के तौर पर बनाए रखना चाहते हैं।

उमर ने कश्मीर समस्या के लिए इसे सर्वाधिक व्यावहारिक हल बताते हुए दलील दी कि भारत ने स्वयं ही इस नियंत्रण रेखा को स्वीकार किया है। इस संबंध में उन्होंने 1999 के करगिल युद्ध का भी उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा, ‘यदि आप नियंत्रण रेखा को नहीं मानते हैं तब इसे एक लचीली सीमा बनना होगा ताकि लोगों और सामानों को मुक्त रूप से आवाजाही की सुविधा मिल सके। मेरा मानना है कि यह हमारे शेष पड़ोसी देशों के लिए एक उदाहरण हो सकता है।’
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पाक‌िस्तान द‌ुन‌िया को गुमराह कर रहा है

उमर ने जम्मू कश्मीर में ‘ट्रूथ एंड रीकॉन्सिलिएशन कमीशन’ यानी ‘सत्य एवं सुलह सफाई आयोग’ बनाने का आह्वान किया जिसे भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों से समान समर्थन हासिल होना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का हवाला देते हुए उमर ने कहा कि जम्मू कश्मीर राज्य से अपने सभी सुरक्षाबलों और कर्मियों को हटाने के संबंध में पाकिस्तान ने अभी तक पहला कदम भी नहीं उठाया है। उन्होंने कहा, ‘यह बिल्कुल साफ है कि पाकिस्तान ने पहला कदम नहीं उठाया।’

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दशकों से इस्लामाबाद अपनी यही बात दुनिया के समक्ष रख रहा है कि यह भारत ही है जो जनमत संग्रह के रास्ते में आ रहा है। उन्होंने कहा कि सच इससे बिल्कुल अलग है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के विपरीत पाकिस्तान ने न केवल कश्मीर की जनसांख्यिकी को बदल दिया है बल्कि राज्य के बड़े भू भाग को चीन को सौंप दिया है जो अब इसपर फिर से नियंत्रण पाने की स्थिति में नहीं है।

उन्होंने कहा कि अपनी तरफ के कश्मीर में जनसांख्यिकीय तब्दीली लाकर पाकिस्तान केवल भारत की ओर के कश्मीर में जनमत संग्रह की बात करता है।
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