राजोरी के कालाकोट के जंगल में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया है। इनमें से एक आतंकी कारी ढांगरी और कंडी हमले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। लेकिन राजोरी के जंगल में अब भी आतंकी छिपे हुए हैं। इन आतंकियों ने पिछले दो वर्ष से इतना मजबूत नेटवर्क खड़ा कर लिया है कि पकड़ में नहीं आ रहे।
दरहाल, थन्नामंडी, बुद्धल, कोटरंका, कंडी, कालाकोट के क्षेत्र में इन आतंकियों ने अपना ठिकाना बना रखा है। पिछले दो साल में इन्होंने चप्पा-चप्पा खंगाल कर छिपने का ठिकाना भी बना लिया है। इस क्षेत्र से बाहर नहीं आते। इसी क्षेत्र में इन्होंने अपने ओजी वर्करों का नेटवर्क बनाया हुआ है, जो इनके लिए हर तरह का बंदोबस्त कर रहे हैं। इनमें महिलाएं तक शामिल हैं।
बड़ी बात यह है कि इनके लिए काम करने वाले ओजी वर्करों का आपस में कोई संपर्क नहीं होता। एक ओजी वर्कर का दूसरे क्षेत्र के ओजी वर्कर से कोई संपर्क नहीं होता है। आतंकियों का इन ओजी वर्करों के साथ सीधा संपर्क है। इनकी मूवमेंट और गतिविधियां सीधे तौर पर चल रही हैं।
नहीं जाना चाहते नई जगह
आतंकियों ने अपने लिए मुफीद नेटवर्क बनाया है। दरहाल, थन्नामंडी, बुद्धल, कोटरंका, कंडी, कालाकोट के बीच इन आतंकियों ने अपना ठिकाना बनाया हुआ है। इसी की मदद से यह एकदम से हमला करके गायब हो जाते हैं। यह उक्त क्षेत्रों से बाहर नहीं जाना चाहते हैं। मारे जाने के डर से इसी क्षेत्र में रहकर नापाक मंसूबे को अंजाम दे रहे हैं।
स्कार्पियो कार का भी इस्तेमाल
राजोरी के जंगलों में सक्रिय आतंकी दो से तीन स्कार्पियों कार का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह स्कार्पियो ओजी वर्करों के लिए नहीं, बल्कि आतंकियों के लिए सीधे इस्तेमाल होती है। जरूरत पड़ने पर आतंकियों को हथियारों के साथ और बिना हथियार के एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है।