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रियासत के व्यापारियों ने रेल बजट को सराहा

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रेल मंत्री सुरेश प्रभु के पिटारे से हालांकि रियासत को कोई नई सौगात नहीं मिली, लेकिन इसके बावजूद उद्यमियों और व्यापारियों ने इसे सराहा है। उनका कहना है कि माल और पैसेंजर किराए में वृद्धि न कर रेल मंत्री ने सकारात्मक कदम उठाया है।
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बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व प्रेसीडेंट अनिल सूरी का कहना है कि इसमें कुछ सकारात्मक कदम है तो कुछ नकारात्मक भी। रेल मंत्री ने पैसेंजर और माल किराए में कोई वृद्धि नहीं की, जिसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा उन्होंने रेल का ढांचा मजबूत करने के लिए कुछ अच्छी घोषणाएं की हैं, जो यात्रियों के लिए अच्छी बात है। हालांकि प्रभु का बजट वर्ष 2016-17 का कम नजर आ रहा है।
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उन्होंने बजट में कई घोषणाएं 2020 पर आधारित की। यानी कुल मिलाकर इसे दूरदर्शी बजट कहा जा सकता है, जो अगले संसदीय चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया गया।
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2020 को ध्यान में रख पेश किया गया दूरदर्शी बजट

चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रेसीडेंट राजेश गुप्ता ने इसे बैलेंस बजट बताया। उनका कहना था कि रियासत के लोग लंबे समय से बड़ी रेल यूनिट की स्थापना की मांग कर रही है, लेकिन प्रभु के पिटारे से कुछ नहीं मिला।

हालांकि इसमें अच्छी बात यह है कि किराए में वृद्धि न होने से रोजमर्रा के सामानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए कई अच्छे कदम उठाए गए हैं, जो सफर में काफी मददगार साबित होंगे। रेल मंत्री को कोई नई रेल परियोजना रियासत को देनी चाहिए थी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते।

रियासत की सबसे बड़ी अनाज मंडी वेयरहाउस की दाल मर्चेंट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट कीर्ति गुप्ता ने रेल बजट संतुलित बताया, लेकिन उनका कहना है कि पिछले डेढ़ साल में डीजल की कीमतों में भारी गिरावट आई है।

इसलिए रेल मंत्री को माल और यात्री किराए में कमी लानी चाहिए थी। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आती। व्यापारी ट्रक से माल लाने की बजाय रेल से माल मंगवाते। एसी फर्स्ट क्लास का किराया विमान के किराए के बराबर है। वैसे यात्री ट्रेन की बजाय विमान को प्राथमिकता देते हैं। 
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