कश्मीर और जम्मू में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बाद जिला और शहरी अस्पतालों में बड़ी संख्या में लोग छोटे रोगों की जांच करवाने के लिए भी पहुंचने लगे हैं। इसमें अधिकांश मरीज खांसी, जुकाम, बुखार से पीडि़त हैं। स्वास्थ्य महकमे के लिए दिक्कत यह खड़ी हो गई है कि स्क्रीनिंग के बाद जिन लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण नहीं मिल रहे हैं वे भी सैंपल लेने के लिए जोर दे रहे हैं। डाक्टरों के अनुसार आने वाले दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।
जीएमसी की इमरजेंसी और ओपीडी में रोजाना करबी पचास ऐसे संदिग्ध मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश खुद में स्वाइन फ्लू के लक्षण बता रहे हैं। मौसम के लिहाज से शहर की बड़ी आबादी खांसी, जुकाम से पीडि़त है। ऐसे में डाक्टरों के लिए भी हर मरीज का इतिहास जानकर स्क्रीनिंग करना चुनौती बन गया है। गत दिवस जीएमसी में 31 संदिग्ध मरीज पहुंचे थे, जिसमें सिर्फ छह के ही सैंपल लिए गए।
शुक्रवार को तीन दर्जन संदिग्ध मरीज पहुंचे, लेकिन सिर्फ पांच ही सैंपल लिए गए। इसी तरह जिला स्तर के अस्पतालों से भी मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है। इनमें अधिकांश मरीज खुद ही तीमारदारों के साथ शहरी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। शहर के गांधीनगर और सरवाल अस्पताल में भी स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है।
स्वाइन फ्लू की दहशत का असर बाजार पर दिखने लगा है। अमूमन सब्जी मंडी, मार्केट जैसे सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की भीड़ कम हुई है। लोग आइसोलेट होने को तवज्जो दे रहे हैं। बाजार में मास्क की बिक्री भी बढ़ी है। खासकर दूसरे राज्यों का सफर करने के लिए निकलने वाले पूरी एहतियात बरत रहे हैं। जम्मू में एक की मौत और कई अन्य पाजिटिव मामले आने से स्वास्थ्य विभाग ने भी कमर कस ली है। इमरजेंसी और ओपीडी में चिकित्सा स्टाफ को भी पूरे एहतियात से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों को देख रहे डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को पूरी तरह से एहतियात बरतने के साथ बचाव के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। चिकित्सा स्टाफ को मास्क वितरित किए गए हैं। संदिग्ध मरीजों के साथ चिकित्सा स्टाफ की सेहत पर भी ध्यान रखा जा रहा है। स्क्रीनिंग वाले स्थलों पर नियमों के तहत चिकित्सा देने के निर्देश दिए गए हैं। कश्मीर में डाक्टरों के स्वाइन फ्लू के वायरस की चपेट में आने के बाद चिकित्सा स्टाफ को वायरस से कवर करने के लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं।
जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार चिकित्सा स्टाफ को सभी एहतियात बरतने को कहा गया है। स्वास्थ्य निदेशक डा. बलजीत सिंह पठानिया का कहना है कि, जम्मू संभाग के सभी दस जिलों में बचाव के साथ जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों में किसी तरह की घबराहट पैदा न हो। हालात अभी नियंत्रण में हैं और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन वायरस से बचाव के लिए सभी जरूरी उपाय करें।
स्वाइन फ्लू पर में प्रशासन गंभीर
डिवीजनल कमिश्नर शांतमानु ने शुक्रवार को जम्मू संभाग के सभी उपायुक्तों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बैठक की। हइसमें प्रमुख रूप से स्वाइन फ्लू पर चर्चा हुई। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि वह अपने जिले में स्वाइन फ्लू की स्थिति को ध्यान में रखते हुए तुरंत सूचित करें और इलाज के लिए लोगों को प्रेरित करे। डिवकॉम ने उपायुक्तों के साथ अन्य भी कई मुद्दों पर बैठक की है, जिसमें पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) के संबंध में प्रमुखता के साथ विचार विमर्श हुआ।
क्यों स्कूलों में नहीं लगेगी मार्निंग असेंबली
स्वाइन फ्लू संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने एहतियातन स्कूलों में मॉर्निंग असेंबली पर रोक लगा दी है। अगला आदेश न मिलने तक तत्काल प्रभाव से निजी और सरकारी स्कूलों की मॉर्निंग असेंबली अब नहीं होगी। यानी बच्चे स्कूल जाकर सीधा कक्षाओं में पढ़ाई करेंगे। इस बाबत जानकारी देते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी टीआर मगोत्रा ने बताया कि सरकारी आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए हिदायतें जारी कर दी गई हैं। स्वाइन फ्लू संक्रमण की चुनौती को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।