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शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

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रामबन में शिक्षा विभाग के कांट्रेक्चुअल कर्मचारी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन करते - फोटो : UDHAMPUR
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रामबन। शिक्षा विभाग के साथ काम करने वाले भूमि दाताओं और रसोइया सह सहायकों ने मंगलवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने ऑल जम्मू एंड कश्मीर कंटिजेंट पेड वर्कर्स एंड कुक एजूकेशन एंप्लाइज यूनियन के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया।
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वे वेतन बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम लागू करने और सेवाओं के नियमितीकरण की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकारी स्कूलों में बहुत कम वेतन पर खाना पकाने का कठिन काम सौंपा गया है, जो उनकी मेहनत का 10 प्रतिशत भी नहीं है। वे दो दशकों से कम वेतन पर काम कर रहे हैं। इससे उन्हें दैनिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
एक प्रदर्शनकारी रसोइया वाजिद अहमद ने कहा कि अधिकांश रसोइया अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले हैं। उनका परिवार उन पर आश्रित है। लेकिन, यह वास्तविकता आज तक शिक्षा विभाग और नेताओं के लिए अनदेखी है। उन्होंने मानदेय में वृद्धि, बिना किसी रुकावट के मासिक आधार पर मानदेय जारी करना और सेवाओं को नियमित करने की मांग की।
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स्कूलों के निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले कुछ भूमि दाताओं ने कहा कि उन्हें भूमि अधिग्रहण के समय नौकरी या जमीन का मुआवजा देने का वादा किया गया था। साल बीतने के बाद भी न तो नौकरी मिली, और न ही मुआवजा। स्कूल शिक्षा विभाग से नाराज प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने उपराज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की, ताकि लोगों को न्याय मिले।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी वास्तविक मांगों को निर्धारित समय में पूरा नहीं किया गया तो उन्हें आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जो स्कूलों के कामकाज को प्रभावित कर सकता है, या किसी अप्रिय घटना का कारण बन सकता है। उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी रामबन को ज्ञापन भी सौंपा।
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