कश्मीर में कौसर नाग यात्रा शुरू करने को लेकर कश्मीर के तकरीबन हर वर्ग द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। उनके अनुसार इस यात्रा के कारण पर्यावरण पर प्रभाव पड़ेगा और वह ऐसा नहीं होने देंगे।
कौसर नाग यात्रा के विरोध में बुधवार को कुलगाम जिले में सेव कौसर नाग फ्रंट द्वारा बंद का आह्वान किया गया था, जिसके चलते सभी दुकानें, व्यवसाय बंद रहे और सड़कों पर यातायात भी नहीं दिखा।
इस यात्रा का राज्य के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और अन्य अलगाववादी नेता पहले से विरोध कर रहे हैं और वह इसे संघ का नया एजेंडा बता रहे हैं।
अलगाववादी नेताओं के अनुसार, इससे क्षेत्र की मुस्लिम पहचान खत्म हो जाएगी
और साथ ही यात्रा से कश्मीर के पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचेगा।
इस
यात्रा का आयोजन इस वर्ष आल पार्टी मिग्रेंट्स कोर्डिनेशन कमेटी
(एपीएमसीसी) द्वारा करवाया जा रहा है। एपीएमसीसी के अध्यक्ष विनोद पंडिता
के अनुसार करीब 40 श्रद्धालुओं का जत्था, जो मंगलवार को जम्मू से रवाना हुआ
था, बुधवार को दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में पहुंच गया है।
पंडिता
के अनुसार, अगर सरकार ने उन्हें यात्रा करने के लिए सुरक्षा प्रदान की तो
विधि अनुसार एक अगस्त को पहुंचकर नाग पंचमी उत्सव मनाएंगे।
उनके
अनुसार, इस यात्रा का राज्य के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और अन्य
अलगाववादी नेता पहले से विरोध कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने सरकार से यात्रा
को सुचारुरूप से आयोजित करवाने के लिए सुरक्षा की मांग की है।
पंडिता
के अनुसार, अगर सुरक्षा मिलती है तो गुरुवार की सुबह यात्रा अगले पड़ाव के
लिए रवाना होगी। उनका यह भी कहना है कि अगर कश्मीरी पंडित यात्रा नहीं कर
पाएंगे तो केंद्र की मोदी सरकार का जम्मू-कश्मीर के विस्थापित पंडितों को
राज्य में पुन: बसाने की नीतियों का क्या फायदा।
गौरतलब है कि कौसर
नाग कश्मीर घाटी में पीर पंजाल पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। इसे कौसर
नाग झील के रूप में भी जाना जाता है और यह समुद्र की सतह से 12000 फुट की
ऊंचाई पर स्थित है। कश्मीर में शुद्ध पानी का यह प्रमुख स्रोत है।