पुलिस कार्रवाई में युवक की मौत के बाद रविवार को श्रीनगर में जमकर बवाल हुआ। घटना से गुस्साई भीड़ ने सड़क पर उतरकर जैनाकोट में श्रीनगर-मुज्जफराबाद रोड को जाम करने की कोशिश की।
इससे रोकने पर पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़प शुरू हो गई। उग्र भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों को तितरबितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
पुलिस से संघर्ष में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। उधर, घटना के प्रति विरोध दर्ज कराने के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर समर्थकों के साथ जुलूस की शक्ल में जा रहे विधायक इंजीनियर रशीद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
घटना के विरोध में इंजीनियर रशीद ने समर्थकों के साथ सोनवार से जुलूस निकाला। हाथों में काली झंडी लेकर वे मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर विरोध दर्ज कराना चाहते थे।
सूचना पर पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास घेरेबंदी कर ली और उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान घेरेबंदी तोड़ने के प्रयास में इंजीनियर रशीद और उनके 22 समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उन्हें राममुंशी बाग थाने ले आए।
कश्मीर पर किसी की सलाह नहीं चाहिए
बाद में मीडिया से बात करते हुए इंजीनियर रशीद ने कहा कि श्रीनगर की रैली में प्रधानमंत्री ने कहा था कि कश्मीर पर किसी की सलाह की जरूरत नहीं है।
यह हर कश्मीरियों के लिए धमकी है कि वह कश्मीर के बारे में सोचना छोड़ दे। यह सुरक्षाबलों को हरी झंडी भी है कि वे कश्मीरियों की हत्या करें और उन्हें दबाएं। इसी का परिणाम है कि पुलिस कार्रवाई में युवक गौहर डार की मौत हो गई।
बाद में इंजीनियर रशीद को पुलिस घेरे में लंगेट छोड़ा गया। पुलिस कार्रवाई में युवक की मौत के विरोध में अलगाववादियों के बंद के आह्वान से रविवार को श्रीनगर में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
बंद को देखते हुए प्रशासन ने आठ थाना क्षेत्रों में पाबंदियां लागू की थीं। खानयार, रैनावारी, नौहट्टा, एमआर गंज, सफाकदल, क्रालकुद, माईसूमा और पारिमपोरा में पाबंदियां थीं। इसके साथ ही सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक, यासीन मलिक, शब्बीर शाह, नईम खान, आसिया अंद्राबी तथा अन्य अलगाववादियों को नजरबंद कर दिया गया था।