शहर में शनिवार से संपत्ति शुल्क लागू हो गया है। इसकी वसूली डेढ़ से दो महीनों के बाद होगी। जब तक शहर में घरों के बाहर डिजिटल हाउस नंबर नहीं लगता और क्यूआर कोड स्थापित नहीं होता, तब तक वसूली नहीं होगी। इसकी जानकारी नगर निगम के मेयर राजिंदर शर्मा ने दी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अभी हमने सभी घरों को पंजीकृत नहीं किया है। निगम की तरफ से शहर के सभी घरों को डिजिटल नंबर दिया जाना है। यह प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होने तक शुल्क नहीं वसूल सकते। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों ने इसका कोई विरोध नहीं किया है।
लोगों को एक मामूली शुल्क देना है। बताया कि इस शुल्क को लेकर हमने लोगों से उनकी राय भी मांगी थी। लोग अपने सुझाव दे रहे हैं। इन सुझावों का संकलन करके सरकार के पास भेजा जाएगा। कहा कि शहर में 5.20 लाख घर हैं।
विज्ञापन
इनमें से 2 लाख के करीब ऐसे घर हैं, जिनको साल में सिर्फ एक हजार रुपये शुल्क देना पड़ेगा। बता दें कि सरकार ने नगर निकायों में संपत्ति शुल्क लगाने का एलान किया था। इसके पहले उप राज्यपाल ने कहा था कि पूरे देश में संपत्ति शुल्क लागू है, सिर्फ जम्मू-कश्मीर में ही नहीं था। शहर के 40 फीसदी लोग शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।