जम्मू। नई शिक्षा नीति पुरानी विसंगतियों को दूर कर वर्तमान वैश्विक रुझानों को ध्यान में रखते हुए समकालीन प्रावधान पेश करती है। यह बातें पीएमओ में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को आजादी का अमृत महोत्सव के तहत नई शिक्षा नीति पर पद्मा सचदेवा महिला कॉलेज गांधीनगर में हुए संवाद कार्यक्रम में कहीं। इसमें उन्होंने क्लस्टर विश्वविद्यालय के शिक्षकों को संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछली शिक्षा नीति में सबसे बड़ी विसंगति नामकरण में ही थी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक मिथ्या नाम था, अपने आप में अन्य अर्थों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाला था। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक दुनिया का हिस्सा और यहां की शिक्षा के मानद भी इसके अनुरूप होने चाहिए। एनईपी-2020 के नए प्रावधानों में से एक बहु-प्रवेश और निकास विकल्प हैं, जो छात्रों पर विभिन्न कैरियर के अवसर देता है। उन्होंने कहा कि पहले डिग्री के साथ शिक्षा को बहुत ज्यादा जुड़ाव था, जिसके कारण पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि हुई है। वहीं इससे अलग एनईपी शिक्षा को रोजगार के साथ जोड़ती है, जिससे युवा अपनी क्षमता के आधार पर रोजगार पा सकेगे। शिक्षा में तकनीकी हस्तक्षेप इस पीढ़ी के छात्रों के लिए एक वरदान है। उन्होंने कहा कि समाज जेंडर न्यूट्रल, लैंग्वेज न्यूट्रल हो गया है, तो उसे अब शिक्षक-शिष्य तटस्थ बनना होगा। इस दौरान प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग रोहित कंसल, वीसी क्लस्टर यूनिवर्सिटी बैचेन लाल, पूर्व मंत्री प्रिया सेठी व अन्य मौजूद रहे।