कठुआ। पर्यावरण और प्रकृति के प्रति राजस्व विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। तीन दशक बीतने के बाद भी संभाग के आधा दर्जन से अधिक वन्यजीव अभयारण्यों की अंतिम अधिसूचना नहीं हो पाई है। यानी इन वन्यजीव अभयारण्यों को सरकार ने घोषित तो कर दिया लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में अभयारण्यों के दायरे में आने वाले लोगों के अधिकारों की सेटलमेंट भी तीन दशकों से नहीं हुई है, जबकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में इसके लिए स्पष्ट निर्देश हैं।
अंतिम अधिसूचना न होने की वजह से कई जगह विभाग को अतिक्रमणकारियों से जूझना पड़ रहा है। उधर, लोगों को अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है। सरकार की ओर से बाकायदा 15 अप्रैल 2007 के एसआरओ 125 के तहत अधिसूचना जारी कर सहायक राजस्व आयुक्त को इसके लिए कलेक्टर बनाया गया है लेकिन संभाग के विभिन्न जिलों में तीन दशक तक इस ओहदे पर रहे अधिकारियों की ओर से कोई भी गंभीरता नहीं दिखाई गई। हाल ही में वन्यजीव विभाग ने मामला मंडलायुक्त के साथ भी उठाया जिसके बाद इसे गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त जम्मू ने सभी जिला उपायुक्तों को प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं।
---
ये अभयारण्य हैं अधिसूचना के इंतजार में
किश्तवाड़ जिले का हाई अल्टीट्यूड नेशनल पार्क, रामनगर वन्यजीव अभयारण्य, नंदनी वन्यजीव अभयारण्य, सुरूईंसर-मानसर वन्यजीव अभयारण्य, जसरोटा वन्यजीव अभयारण्य, बनी वन्यजीव अभयारण्य और तत्ता कुट्टी वन्यजीव अभयारण्य को फिलहाल अंतिम अधिसूचना का इंतजार है।
---
सरकार की ओर से पहली अधिसूचना के साथ ही सभी वन्यजीव क्षेत्र तैयार हो जाते हैं और यहां एक्ट लागू हो जाते हैं। अंतिम अधिसूचना के लिए राजस्व विभाग को क्लेम सेटलमेंट करनी होती है। यह प्रक्रिया राजस्व विभाग को पूरी करनी होती है। हाल में सरकार ने फॉरेस्ट राइट एक्ट को भी लागू कर दिया है। समय-समय पर वन्यजीव विभाग की ओर से मामला उठाया गया है। मंडलायुक्त जम्मू ने मामले को गंभीरता से लिया है।
- एसके गुप्ता, चीफ वाइल्ड लाइफ वाडन, जम्मू-कश्मीर