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कर्ज लेकर बने डेंटल सर्जन, नौकरी नहीं मिलने से किस्तें चुकानी हो रही मुश्किल

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जम्मू। प्रदेश में सैकड़ों दंत चिकित्सक रोजगार न मिलने से परेशान हैं। इनमें से कई ने एजुकेशन लोन लेकर पढ़ाई पूरी की, लेकिन नौकरी नहीं मिली। अब किस्तें चुकाना मुश्किल हो रहा है। वर्ष 2008 के बाद से प्रदेश में दंत चिकित्सकों के नए पद सृजित नहीं होने से इन चिकित्सकों के सामने बेरोजगारी की समस्या बढ़ी है। इन दंत चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) व अन्य केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं में भी नहीं लगाया गया है। हर साल जम्मू कश्मीर में करीब 226 दंत चिकित्सक पास आउट हो रहे हैं, लेकिन उन्हें रोजगार देने के लिए कोई प्रभावी नीति अमल में नहीं लाई गई है। इससे सैकड़ों दंत चिकित्सकों के समक्ष बेरोजगारी का संकट बढ़ा है।
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केस -1
जम्मू डेंटल सर्जन एसोसिएशन जम्मू के अध्यक्ष डॉ. राहुल कौल ने वर्ष 2013-14 में दंत चिकित्सक बनने के लिए प्रदेश के एक प्रतिष्ठित बैंक से दस लाख रुपये का एजूकेशन ऋण लिया था। उस समय सोचा था कि दंत चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करने के साथ बेहतर रोजगार पा सकेंगे। वर्ष 2016 में दंत चिकित्सक की ख्याती मिली, लेकिन उसके बाद धीरे धीरे सपने कमजोर होते गए और आज वह दंत चिकित्सक बनने के पांच साल बाद भी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। उनका कहना है कि बेरोजगारी के साथ बैंक के ऋण की किश्ते चुकाने का तनाव बढ़ता जा रहा है। उनकी तरह सैकड़ों डेंटल सर्जनों को रोजगार देने की दिशा में कुछ खास नहीं किया गया है।
केस -2
दंत चिकित्सक प्रिया ने कहा कि बैंक से ऋण लेकर उन्होंने दंत चिकित्सक बनने का सपना देखा था और वह पूरा भी हुआ, लेकिन रोजगार न मिल पाने के कारण उन्हें निराशा हुई है। सालों से बेरोजगारी को झेलते हुए तनाव बढ़ा है। सरकार दंत चिकित्सकों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है, जबकि प्रदेश के लगभग हिस्सों में दंत चिकित्सा की अधिक जरूरत महसूस की जा रही है।
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2016 में 297 पद सृजत करने की कवायद सिरे नहीं चढ़ी
दंत चिकित्सकों का कहना है कि वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जम्मू संभाग में 297 दंत चिकित्सकों की मांग की गई थी। इस फाइल को वित्त विभाग के पास भेजा गया, लेकिन दंत चिकित्सकों के लिए नए पद सृजित नहीं किए जा सके हैं। जम्मू-कश्मीर डेंटल सर्जन एसोसिएशन के अधीन 5500 डेंटल सर्जन पंजीकृत हैं, जबकि यह आंकड़ा इससे अधिक है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हाल ही में 400 डेंटल सर्जनों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए वित्तीय मदद की घोषणा की थी, लेकिन दंत चिकित्सकों का कहना है कि सरकार उन्हें ऋण सुविधा मुहैया करवा रही है, जिससे उन पर अधिक आर्थिक बोझ बढ़ेगा। दंत चिकित्सकों ने आगामी त्रिकुटा नगर स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन का मन बनाया है।
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