स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से एलान के पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत का होमवर्क कर लिया था। अलगाववादियों से बातचीत के लिए मध्यस्थों की सक्रियता जून से ही शुरू हो गई थी, लेकिन उसके बाद कश्मीर में भारी उपद्रव ने इन कोशिशों पर ब्रेक लगा दिया।
अमरनाथ यात्रा पर हमले से इस प्रक्रिया में बाधा पहुंची। पीएम मोदी ने पूर्व आईबी चीफ दिनेश्वर शर्मा को केंद्र का प्रतिनिधि बनाने का भी फैसला पहले कर लिया था। पूर्व आईबी चीफ ने जुलाई के अंतिम और अगस्त के पहले सप्ताह में श्रीनगर का दौरा कर पीएम मोदी को रिपोर्ट दी। तब पंद्रह अगस्त को मोदी ने गाली और गोली से नहीं, बल्कि गले लगाकर कश्मीर मसले का समाधान करने का एलान किया।
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गौरतलब है कि सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए अलगाववादियों समेत सभी पक्षों से बातचीत करने के लिए पूर्व आईबी चीफ दिनेश्वर शर्मा को प्रतिनिधि नियुक्त किया है।
शासन के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि पूर्व आईबी चीफ की अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक से श्रीनगर दौरे में मुलाकात हो चुकी है। तब यासीन मलिक से मुलाकात संभव नहीं हो पाई थी। जुलाई के अंतिम सप्ताह में तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि का दौरा भी हुआ।
फाइल
टेरर फंडिंग में एनआईए द्वारा शिकंजा कसे जाने के बाद अलगाववादियों की गोपनीय अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई। सुरक्षा बलों और सेना के आपरेशन आलआउट में अधिकांश आतंकी कमांडर ढेर हो गए। सेना और बीएसएफ ने पाकिस्तान से आतंकी घुसपैठ को भी रोका।
जिन आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की वे एलओसी पर ही मारे गए। इस पृष्ठभूमि के बाद अलगाववादियों के समक्ष समर्पण की मजबूरी पैदा हुई। दामाद और करीबियों पर एनआईए की कार्रवाई के बाद गिलानी झुके और जम्मू कश्मीर में जीएसटी को लागू करने पर सहमति दी।
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इससे जीएसटी के नाम पर शुरू हो रहा आंदोलन बंद हो गया। गिलानी के इस कदम से केंद्र को हरी झंडी मिली। गिलानी ने जीएसटी का विरोध कर रही नेशनल कांफ्रेंस के खिलाफ मोर्चा खोलकर केंद्र को सकारात्मक संदेश दिए। इसके बाद केंद्रीय प्रतिनिधि से गिलानी की मुलाकात आसान हो गई।
मीरवाइज से बातचीत की पहल जून में शुरू हुई थी। तब 14 जून को अमर उजाला ने ‘उदारवादी धड़े से वार्ता की हो रही पहल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, लेकिन मीरवाइज की मौजूदगी में एक पुलिस अफसर की लींचिंग से यह प्रक्रिया थम गई।
दिनेश्वर शर्मा
- फोटो : ani
अलगाववादियों से वार्ता में अब भी हैं कई अड़चनें
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में सर्वदलीय टीम के दौरान अलगाववादियों ने विपक्ष के नेताओं को दरवाजे से लौटा दिया था। राजनाथ दोबारा आकर प्रतिनिधिमंडलों से मिले। भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की टीम के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भी टीम आई। पीडीपी नेता भी अलगाववादियों से मिलकर माहौल बनाते रहे, लेकिन अड़चनें अब भी कायम हैं। भारतीय संविधान के दायरे में बातचीत की शर्त पर अलगाववादियों में अब भी अंतर्विरोध है।
राजनाथ और राममाधव ने भी दिए थे संकेत
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा महासचिव राममाधव ने भी कश्मीर मसले के स्थायी समाधान के लिए सभी पक्षों से बातचीत के संकेत दिए थे, लेकिन इस पहल पर अलगाववादियों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं आई। अब केंद्र द्वारा वार्ता के लिए मध्यस्थ तय कर दिए जाने के बाद अलगाववादी गुटों पर दबाव बढ़ा है।
इस माह के अंत में कश्मीर आ सकते हैं पूर्व आईबी चीफ
केंद्र की ओर से नियुक्त प्रतिनिधि पूर्व आईबी चीफ दिनेश्वर शर्मा 30 अक्तूबर के बाद श्रीनगर आ सकते हैं। केंद्र ने उन पर अलगाववादियों समेत सभी पक्षों से बातचीत का जिम्मा सौंपा है। राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार केंद्र के मध्यस्थ 30 या 31 अक्तूबर को या फिर नवंबर के पहले सप्ताह में कश्मीर आएंगे।