जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने त्रि स्तरीय रणनीति बनाई है। दिल्ली में गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा के बाद प्रदेश में टारगेट किलिंग रोकने, ड्रोन से गिराए जाने वाले हथियार और गोला बारूद पर नजर रखने और कश्मीर में रहने वाले गैर कश्मीरी एवं अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने त्रि स्तरीय रणनीति बनाई है। दिल्ली में गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा के बाद प्रदेश में टारगेट किलिंग रोकने, ड्रोन से गिराए जाने वाले हथियार और गोला बारूद पर नजर रखने और कश्मीर में रहने वाले गैर कश्मीरी एवं अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। बैठक में चर्चा के दौरान बताया गया कि ड्रोन से हथियार, गोला बारूद और नशे की खेप फेंकने की वारदातों पर नजर रखने के लिए इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी ग्रिड तैयार किया गया है।
विज्ञापन
इसमें अग्रिम सुरक्षा पंक्ति में बीएसएफ एवं सेना और दूसरे फ्रंट पर स्थानीय पुलिस नजर रखेगी। यह तीनों मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा कश्मीर में अल्पसंख्यकों और गैर कश्मीरियों की कॉलोनियों में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा। अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस जवानों को इन कॉलोनियों में तैनात किया जाएगा। वहीं कश्मीर में हाइब्रिड आतंकियों की तलाश के लिए विशेष संयुक्त तंत्र तैयार किया गया है।
इसमें प्रदेश पुलिस, अर्द्धसैनिक बल, सेना, बीएसएफ मिलकर केंद्र की जांच एजेंसियों में एनआईए समेत अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर आतंकियों को तलाश कर ढेर किया जाएगा। केंद्र और प्रदेश की सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां मिलकर इस पर काम करेंगे। ताकि हाइब्रिड आतंकियों की तलाश की जा सके। यह सभी फैसले दिल्ली में हुई गृह मंत्रालय की सुरक्षा बैठक में लिए गए हैं।
विज्ञापन
बैठक में गृह सचिव अजय भल्ला, संयुक्त सचिव, डीजीपी दिलबाग सिंह, पुलिस मुख्यालय में तैनात एडीजीपी एम के सिन्हा, डीजीपी सीआरपीएफ और डीजीपी बीएसएफ के अलावा आईबी, रॉ के अफसर मौजूद रहे। बैठक में आतंकवाद से सख्ता से निपटने के लिए कहा गया है। खासकर कश्मीर में हाइब्रिड आतंकियों और टारगेट किलिंग को रोकने पर जोर दिया गया है।
प्रदेश की सुरक्षा बनेगी देश का मुख्य सुरक्षा एजेंडा
19 नवंबर को डीजीपी और आईजी स्तर की कांफ्रेंस होने जा रही है। यह कांफ्रेंस हर साल होती है। माना जा रहा है कि इस कांफ्रेंस में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को राष्ट्रीय एजेंडा बनाकर इस पर बात होगी, ताकि प्रदेश की सुरक्षा को लेकर देशभर की पुलिस से राय मांगी जाए और कोई अहम फैसला लिया जाए। दो दिन पहले ही प्रदेश की सुरक्षा को लेकर बैठक होना एक बड़ा संकेत हैं कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का एजेंडा बनाया जाएगा।