पिछले साल जून से रेलवे घाटी के लिए एक भरोसेमंद जीवनरेखा बनकर उभरा है। कड़ाके की सर्दी जब बाकी रास्ते बर्फबारी के कारण बंद हो गए तब रेलवे ने कनेक्टिविटी का मजबूत विकल्प दिया था। बारिश और भूस्खलन के कारण जब जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुआ तब भी रेलवे ने ही संकटमोचक बनकर कश्मीर के सेबों को खराब होने से बचाया और देश की विभिन्न मंडियों तक सुरक्षित पहुंचाया। खाद्य सामग्री की आपूर्ति, जरूरी कार्गो कंसाइनमेंट और पशुपालन विभाग द्वारा मवेशियों की ढुलाई में भी इस रेल नेटवर्क ने भूमिका निभाई है।
प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी मिलते ही दिया जाएगा मुआवजा
केंद्र सरकार ने अब कश्मीर में रेलवे का एक और व्यापक जाल बिछाने जा रही है। चार नई और अहम रेल लाइनों के विस्तार का खाका तैयार कर लिया गया है। एक अधिकारी के अनुसार इन प्रस्तावित लाइनों का अलाइनमेंट (रूट) संबंधित जिला प्रशासनों के परामर्श से फाइनल कर लिया है। इन प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी जमीन का आकलन भी पूरा हो चुका है। प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी मिलते ही जमीन, पेड़ों और मौजूदा ढांचों के अधिग्रहण के लिए तय कानूनों के तहत प्रभावितों लोगों को मुआवजा दिया जाएगा।
एलओसी तक सेना की पहुंच होगी आसान
यह विस्तार केवल आम लोगों, किसानों और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी गेम-चेंजर साबित होगा। बारामुला-उड़ी जैसी लाइनों के बनने से भारतीय रेल सीधा नियंत्रण रेखा (एलओसी) तक पहुंच जाएगी। कश्मीर के साथ-साथ जम्मू संभाग में भी रेलवे अपने ढांचे को नई ऊंचाइयां दे रहा है। प्रस्तावित जम्मू-राजोरी रेल लाइन के शुरू होने से जम्मू क्षेत्र में भी एलओसी तक ट्रेन की पहुंच सुनिश्चित होगी। इससे पूरे क्षेत्र की सीमावर्ती कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार आएगा।