पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते के तहत रन द वाटर स्कीम के अंतर्गत चिनाब और झेलम दरिया पर बनी पनबिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन में गिरावट का सिलसिला हर दिन के साथ बढ़ता जा रहा है।
ठंड बढ़ने के साथ दरियाओं में जल स्तर कम होने पर उत्पादन में आने वाले दिनों में और भी गिरावट होगी। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते के तहत रावी, व्यास और सतलुज का पानी भारत के प्रयोग के लिए है और जम्मू कश्मीर में चिनाब और झेलम दरिया का पानी रियासती सरकार सीमित प्रयोग कर सकती है।
इसलिए झेलम और चिनाब दरिया पर निर्मित परियोजनाओं में सर्दियों में पन बिजली उत्पादन गिरकर न्यूनतम स्तर तक पहुंच जाता है। प्रधानमंत्री द्वारा पांच नवंबर को लोकार्पण की जाने वाली 450 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की बगलिहार दो परियोजना भी रन द वाटर स्कीम के अंतर्गत ही है।
इस वजह से इस परियोजना से भी सर्दियों में क्षमता के अनुसार उत्पादन नहीं हो पाएगा और गर्मी के मौसम में जल स्तर में बढ़ोतरी के बाद ही परियोजना में उत्पादन तय क्षमता के तहत होगा। पन बिजली उत्पादन में गिरावट से आने वाले समय उपभोक्ताओं पर बिजली कटौती की मार भी बढ़ेगी।